क़ुर्बानी का बयान
क़ुर्बानी के जानवर में शिरकत, मसाइल
(पार्ट 18)
1️⃣3️⃣ सात (7) शख़्सों ने क़ुर्बानी के लिए गाय ख़रीदी थी उनमें एक का इन्तेक़ाल हो गया उसके वरसा ने शुरका से ये कह दिया कि तुम इस गाय को अपनी तरफ़ से और उसकी तरफ़ से क़ुर्बानी करो उन्होंने कर ली तो सबकी क़ुर्बानीयां जायज़ हैं और अगर बग़ैर इजाज़त वरसा उन शुरका ने की तो किसी की न हुई।
1️⃣4️⃣ गाय के शुरका में से एक काफ़िर है या उनमें एक शख़्स का मक़सुद क़ुर्बानी नहीं है बल्कि गोश्त हासिल करना है तो किसी की क़ुर्बानी न हुई बल्कि अगर शुरका में से कोई गुलाम या मुद्दबीर है जब भी क़ुर्बानी नहीं हो सकती क्योंकि ये लोग अगर क़ुर्बानी की नियत भी करें तो नियत सही नहीं।
1️⃣5️⃣ शुरका में से एक की नियत इस साल की क़ुर्बानी है और बाक़ियों की नियत साल गुज़िश्ता की क़ुर्बानी है तो जिसकी इस साल की नियत है उसकी क़ुर्बानी सही है और बाक़ियों की नियत बातिल क्योंकि साल गुजिश्ता की क़ुर्बानी इस साल नहीं हो सकती उनलोगों की यह क़ुर्बानी तत्ववा यानि नफ़्ल हुई और उनलोगों पर लाज़िम है कि गोश्त को सदक़ा कर दें बल्कि उनका साथी जिसकी क़ुर्बानी सही हुई है वह भी गोश्त सदक़ा कर दे।
📚बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 343
जारी है.......
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Qurbani Ke Janwar Mein Shirkat Part 18
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