Roza Ka Bayan Aur Masail Part 2

रोज़ा का बयान और मसाइल

पार्ट 2


➡️ रोज़ा उर्फ़े शरअ में मुसलमान का बा नियत ए  इबादत सुबह सादिक़ से ग़ुरूबे आफ़ताब तक अपने को क़स्दन (जानबूझ कर) खाने पीने जिमाअ (हमबिस्तरी) से बाज़ रखना, औरत का हैज़ व निफ़ास से ख़ाली होना शर्त है। 

1️⃣ रोज़े के  *तीन दर्जे* हैं। 
*{1}* आम लोगों का रोज़ा कि यही पेट और शर्मगाह को खाने पीने, जिमाअ (हम्बिस्तरी) से रोकना।

 *{2}* ख़्वास का रोज़ा कि उनके अलावा कान, आँख, ज़बान, हाथ, पाँव और तमाम आज़ा को गुनाह से बाज़ रखना।

*{3}* ख़ासुलख़ास का कि अल्लाह तआला के सिवा कायनात की हर चीज़ से अपने को पूरी तरह जुदा करके सिर्फ़ उसी की तरफ़ मुतवज्जेह रहना।

2️⃣ रोज़े की *पाँच क़िस्में* हैं :-
(1) फ़र्ज़, (2) वाजिब, (3) नफ़्ल, (4) मकरूहे तन्ज़ीही, (5) मकरूहे तहरीमी।

➡️ *फ़र्ज़ व वाजिब की दो क़िस्में है* मुअय्यन व ग़ैर मुअय्यन।

 🟢 फ़र्ज़े मुअय्यन जैसे अदा ए रमज़ान।

 🟡 फ़र्ज़े ग़ैर मुअय्यन जैसे क़ज़ा ए रमज़ान और रोज़ा कफ़्फ़ारा।

⚫ वाजिब ए मुअय्यन जैसे नज़रे मुअय्यन।

🟤 वाजिब ए ग़ैर मुअय्यन जैसे नज़रे मुतलक़।

➡️ *नफ़्ल दो (2) हैं*

🟣 *नफ़्ल ए मसनुन* जैसे आशूरा यानी दसवीं मुहर्रम का रोज़ा और उसके साथ नौवीं (9) का भी।

🟤 *नफ़्ल ए मुस्तहब* और हर महीने में तेरहवीं, चौदहवीं, पन्द्रहवीं और अरफ़ा का रोज़ा, पीर और जुमेरात का रोज़ा, शश ईद के रोज़े यानी ईद के बाद छः (6) रोज़े, सोम ए दाऊद علیہ السلام के रोज़े यानी एक दिन रोज़ा एक दिन का इफ़्तार। 

➡️ *मकरुह दो (2) हैं*

 🟡 *मकरूहे तन्ज़ीही :-* जैसे सिर्फ़ हफ़्ते के दिन रोज़ा रखना। नैरोज़ व महरगान के दिन रोज़ा। सौम ए दहर (यानी हमेशा रोज़ा रखना), सौम ए सुकूत (यानी ऐसा रोज़ा जिसमें कुछ बात न करे), सौम ए विसाल कि रोज़ा रखकर इफ़्तार न करे और दूसरे दिन फिर रोज़ा रखे, यह सब मकरूहे तनज़ीही हैं। 

🟣 *मकरूहे तहरीमी :-* जैसे ईद और अय्यामे तशरीक़ ( ईद, बक़रीद और उसके बाद के तीन दिन यानी उन पाँचों {5} दिनों) के रोज़े।

3️⃣ रोज़े के मुख़्तलिफ़ असबाब हैं, रोज़ा रमज़ान का सबब माहे रमज़ान का आना, रोज़ा नज़्र का सबब मन्नत मानना, रोज़ा कफ़्फ़ारा का सबब क़सम तोडना या क़त्ल या ज़हार वग़ैरह। 

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 5, सफ़ा 966 - 967

❤️💚❤️ इंशा अल्लाह आगे जारी रहेगा...

✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Roza Ka Bayan Aur Masail Bahar E Shariat  Part 2

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