Roza Ka Bayan Aur Masail Part 5

रोज़ा का बयान और मसाइल

पार्ट 5


 1️⃣4️⃣ रात में नियत की फ़िर उसके बाद रात ही में खाया पिया, तो नियत जाती न रही वही पहली काफ़ी है फ़िर से नियत करना ज़रूरी नहीं।

 1️⃣5️⃣ औरत हैज़ व निफ़ास वाली थी, उसने रात में कल रोज़ा रखने की नियत की और सुबह सादिक़ से पहले हैज़ व निफ़ास से पाक हो गई तो रोज़ा सही हो गया ।

1️⃣6️⃣ दिन में वह नियत काम की है कि सुबह सादिक़ से नियत करते वक़्त तक रोज़ा के ख़िलाफ़ कोई अम्र (काम) न पाया गया हो, लिहाज़ा अगर सुबह सादिक़ के बाद भूल कर भी खा पी लिया हो या जिम्आ कर लिया तो अब नियत नहीं हो सकती। मगर मोअतमद यह है कि भूलने की हालत में अब भी नियत सही है।

1️⃣7️⃣ जिस तरह नमाज़ में कलाम की नियत की, मगर बात न कि तो नमाज़ फ़ासीद न होगी। यूँही रोज़ा में तोड़ने की नियत से रोज़ा नहीं टूटेगा, जब तक तोड़ने वाली चीज़ न करे।

1️⃣8️⃣ अगर रात में रोज़ा की नियत की फ़िर पक्का इरादा कर लिया कि नहीं रखेगा तो वह नियत जाती रही। अगर नई नियत न की और दिन भर भूखा-प्यासा रहा और जिम्आ से बचा तो रोज़ा न हुआ।

1️⃣9️⃣ सेहरी खाना भी नियत है, ख़्वाह रमज़ान के रोज़े के लिए हो या किसी और रोज़ा के लिए, मगर जब सेहरी खाते वक़्त यह इरादा है कि सुबह को रोज़ा न होगा तो यह सेहरी खाना नियत नहीं।

2️⃣0️⃣ रमज़ान के हर रोज़ा के लिए नई नियत की ज़रूरत है, पहली या किसी तारीख़ में पूरे रमज़ान के रोज़ा की नियत कर ली तो यह नियत सिर्फ़ उसी एक दिन के हक़ में है, बाक़ी दिनों के लिए नहीं।

2️⃣1️⃣ यह तीनों यानी रमज़ान की अदा और नफ़्ल व नज़रे मोअय्यन मुतलकन रोज़ा की नियत से हो जाते हैं, ख़ास उन्हीं की नियत ज़रूरी नहीं। यूँही नफ़्ल की नियत से भी अदा हो जाते हैं, बल्कि ग़ैर मरीज़ व मुसाफ़िर ने रमज़ान में किसी और वाजिब की नियत की जब भी उसी रमज़ान का होगा।

2️⃣2️⃣ मुसाफ़िर और मरीज़ अगर रमज़ान शरीफ़ में नफ़्ल या किसी दूसरे वाजिब की नियत करें तो जिसकी नियत करेंगे, वही होगा रमज़ान का नहीं। और मुतल्लिक़ रोज़े की नियत करें तो रमज़ान का होगा।

2️⃣3️⃣ नज़रे मोअय्यन यानी फ़लां दिन रोज़ा रखूँगा, इस में अगर उस दिन किसी और वाजिब की नियत से रोज़ा रखा तो जिसकी नियत से रोज़ा रखा, वह हुआ मिन्नत की क़ज़ा दे।

2️⃣4️⃣ रमज़ान के महीने में कोई और रोज़ा रखा और उसे यह मालूम न था कि यह माह ए रमज़ान है, जब भी रमज़ान ही का रोज़ा हुआ।

📚बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 5, सफ़ा 969 - 670

🟣🟡🟤 इंशा अल्लाह आगे जारी रहेगा.....

✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Roza Ka Bayan Aur Masail Bahar E Shariat
 Part 5

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