Roza Ka Bayan Part 1 (Bahar E Shariat)

रोज़ा का बयान 

पार्ट 1

❤️ चन्द हदीस शरीफ़ ⤵️


1️⃣ हज़रते अबु हुरैरा رضی اللہ تعالٰی عنہ से मरवी है हुज़ूर “ﷺ” फ़रमाते हैं:- जब रमज़ान आता है, आसमान के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं ।
एक रिवायत में है कि जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं।
एक रिवायत में है की रहमत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं और जहन्नम के दरवाज़े बन्द कर दिए जाते हैं और शयातीन ज़ंजीरों में जकड़ दिए जाते हैं।

2️⃣ हज़रते अनस رضی اللہ تعالٰی عنہ से रावी है कि रमज़ान आया तो हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया:- ये महीना आया इसमें एक रात हज़ार महीनों से बेहतर है, जो इससे महरूम रहा, वो हर चीज़ से महरूम रहा और उसकी ख़ैर से वही महरूम होगा, जो पूरा महरूम है।

3️⃣ जब रमज़ान का महीना आता रसूलल्लाह “ﷺ” सब क़ैदियों को रिहा फ़रमा देते और हर साइल को अता फ़रमाते।

4️⃣ नबी “ﷺ” ने फ़रमाया जन्नत इब्तेदाए साल से साल आइन्दा तक रमज़ान के लिए आरास्ता की जाती है, जब रमज़ान का पहला दिन आता है तो जन्नत के पत्तों से अर्श के नीचे एक हवा हुरैन पर चलती है, वो कहती हैं,
 ऐ रब! तू अपने बंदों से हमारे लिए उनको शौहर बना, जिनसे हमारी आँखें ठंढी हों और उनकी आंखें हमसे ठंढी हों।

5️⃣ हुज़ूर “ﷺ” फ़रमाते हैं:- जन्नत में आठ(8) दरवाज़े हैं, उनमें एक दरवाज़ा का नाम रैय्यान है, उस दरवाज़ा से वही जाएंगे जो रोज़े रखते हैं।

6️⃣ हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया अगर बंदों को मालूम होता कि रमज़ान क्या चीज़ है तो मेरी उम्मत तमन्ना करती की पूरा साल रमज़ान ही हो।

7️⃣ हुज़ूर “ﷺ” फ़रमाते हैं कि:- जिसने रमज़ान का रोज़ा रखा और उसकी हुदूद को पहचाना और जिस चीज़ से बचना चाहिए उससे बचा तो जो पहले कर चुका है उसका कफ़्फ़ारा हो गया।

8️⃣ हुज़ूर “ﷺ” फ़रमाते हैं कि रोज़ादार की दुआ, इफ़्तार के वक़्त रद्द नहीं कि जाती।

9️⃣ हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया रमज़ान की आखिर शब में इस उम्मत की मग़फ़िरत होती है। अर्ज़ की गई, क्या वो शब ए क़द्र है?
फ़रमाया:- नहीं वो लेकिन काम करने वाले को उस वक़्त मज़दूरी पूरी दी जाती है जब काम पूरा करले।

🔟 हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया:- हर शय के लिए ज़कात है और बदन की ज़कात रोज़ा है और रोज़ा निस्फ़े सब्र है।

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 5, सफ़ा 958 - 965

🔵🟡🔵 इंशा अल्लाह आगे जारी रहेगा.....

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी


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