Roza Ke Makroohat Ka Bayan Masail Part 3

रोज़ा के मकरूहात का बयान , मसाइल 

पार्ट 3


1️⃣3️⃣ अगर रोज़ा रखेगा तो कमज़ोर हो जाएगा खड़े होकर नमाज़ ना पढ़ सकेगा तो हुक्म है कि रोज़ा रखे और बैठकर नमाज़ पढ़े। 

जब कि खड़ा होने से उतना ही आजिज़ हो जो बाबे सलातुल मरीज़ में (मरीज़ के बयान में) गुज़रा। 

1️⃣4️⃣ सेहरी खाना और उसमें ताख़ीर (देरी) करना मुस्तहब है मगर इतनी ताख़ीर मकरूह है कि सुबह होने का (यानी सेहरी का वक़्त ख़त्म होने का) शक हो जाए। 

1️⃣5️⃣ इफ़्तार में जल्दी करना मुस्तहब है मगर इफ़्तार उस वक़्त करे कि ग़ुरूब (सूरज डूबने) का ग़ालिब ग़ुमान हो जब तक ग़ुमान ए ग़ालिब ना हो इफ़्तार ना करे अगरचे मुअज़्ज़िन ने अज़ान कह दी है और अब्र (आसमान पर बादल ग़र्द गुबार) के दिनों में इफ़्तार में जल्दी ना चाहिए। 

1️⃣6️⃣ एक आदिल के क़ौल पर इफ़्तार कर सकता है जबकि उसकी बात सच्ची मानता हो और अगर उसकी तस्दीक़ ना करे तो उसके क़ौल की बिना पर इफ़्तार ना करे यूहीं मस्तूर के कहने पर इफ़्तार ना करे और आजकल अक्सर इस्लामी मक़ामात में इफ़्तार के वक़्त तोप चलने का रिवाज है उस पर इफ़्तार कर सकता है अगरचे तोप चलाने वाले फ़ासिक़ हों जबकि किसी आलिमे मुहक़्क़ि तौक़ियत दान मोहतात फ़िद्दीन (वक़्तों के जानने वाले दीन की एहतियात करने वाले) के हुक्म पर चलती हो। आजकल के आम उल्मा भी इस फ़न से नवाक़िफ़ महज़ हैं और जंत्रयां कि साऐ (छपती) होती हैं अक्सर ग़लत होती हैं उन पर अमल जाइज़ नहीं यूहीं सेहरी के वक़्त अक्सर जगह नक़्क़ारा बजता है उन्हीं शराइत के साथ इसका भी ऐतबार है अगरचे बजाने वाले कैसे ही हों।

1️⃣7️⃣ सेहरी के वक़्त मुर्ग़ की अज़ान का ऐतबार नहीं के अक्सर देखा गया है कि सुबह से बहुत पहले अज़ान शुरू कर देते हैं बल्कि जाड़े के दिनों में तो बाज़ मुर्ग़ 2:00 बजे से अज़ान कहना शुरू कर देते हैं हालांकि उस वक़्त सुबह होने में बहुत वक़्त बाक़ी रहता है यूहीं बोलचाल सुनकर और रोशनी देखकर बोलने लगते हैं। 

1️⃣8️⃣ सुबह सादिक़ को रात का मुतलक़न छठा या सातवां हिस्सा समझना ग़लत है रहा ये कि सुबह किस वक़्त होती है उसे हम हिस्सा सोम (3) बाबुल औक़ात में बयान कर आए वहां से मालूम करें। 

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 5, सफ़ा 998 - 999 

🟣 रोज़ा के मकरुहात का बयान मुकम्मल हुए! 

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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