Roza Todne Wali Chijon Ka Bayan Part 1

रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ों का बयान

पार्ट 1


चन्द हदीस शरीफ़ ⤵️

1️⃣ बुख़ारी व अहमद व अबू दाऊद व तिर्मिज़ी व इब्ने माजा व दारमी, अबू हुरैरा رضی اللہ تعالٰی عنہ से रावी, कि हुज़ूर ए अक़दस “ﷺ” फ़रमाते हैं :- जिसने रमज़ान के एक दिन का रोज़ा बग़ैर रुख़सत व बग़ैर मर्ज़ इफ़्तार किया तो ज़माना भर का रोज़ा उसकी क़ज़ा नहीं हो सकता, अगरचे रख भी ले यानी वो फ़ज़ीलत जो रमज़ान में रखने की थी किसी तरह हासिल नहीं कर सकता तो जब रोज़ा ना रखने में ये सख़्त वईद है रखकर तोड़ देना तो इससे सख़्त तर है। 

2️⃣ इब्ने खुज़ैमा व इब्ने हब्बान अपनी सही में अबू उमामा बाहिली رضی اللہ تعالٰی عنہ से रावी, कहते हैं मैंने रसूलल्लाह “ﷺ” से सुना कि हुज़ूर “ﷺ” फ़रमाते हैं :- मैं सो रहा था, दो शख़्स हाज़िर हुए और मेरे बाज़ू पकड़कर एक पहाड़ के पास ले गए और मुझसे कहा चढ़िये मैंने कहा मुझ में इसकी ताक़त नहीं उन्होंने कहा हम सहल कर देंगे, मैं चढ़ गया जब बीच पहाड़ पर पहुंचा तो सख़्त आवाज़ें सुनाई दीं, मैंने कहा :-  ये कैसी आवाज़ें हैं? उन्होंने कहा :- ये जहन्नमियों की आवाज़ें हैं फिर मुझे आगे ले गए, मैंने एक क़ौम को देखा के वो लोग उल्टे लटकाए गए हैं और उनकी बाछें चीरी जा रही हैं, जिन से खून बहता है। मैंने कहा :- ये कौन लोग हैं? कहा :- ये वो लोग हैं के वक़्त से पहले रोज़ा इफ़्तार कर देते हैं। 

3️⃣ अबू यअला बासनाद हसन इब्ने अब्बास رضی اللہ تعالٰی عنہما से रावी, कि इस्लाम के कड़े (बुनियाद) और दीन के क़वाइद तीन हैं जिन पर इस्लाम की बिना (बुनियाद) मज़बूत की गई, जो इनमें एक को तर्क करे (छोड़े) वो काफ़िर है, उसका खून हलाल है, कलमा ए तौहीद की शहादत और नमाज़े फ़र्ज़ और रोज़ा ए रमज़ान, और एक रिवायत में है जो इनमें से एक को तर्क करे (छोड़े) वो अल्लाह عزوجل के साथ कुफ़्र करता है और उसका फ़र्ज़ व नफ़्ल कुछ मक़बूल नहीं। 

🟣🟤 *मसाइल* ⤵️⤵️

1️⃣ खाने-पीने, जिम्आ (हमबिस्तरी) करने से रोज़ा जाता रहता है, जबकि रोज़ादार होना याद हो। 

2️⃣ हुक्क़ा, सिगार, सिगरेट, चर्ट (चरस) पीने से रोज़ा जाता रहता है, अगरचे अपने ख़्याल में हल्क़ तक धुआं ना पहुंचाता हो, बल्कि पान या सिर्फ़ तम्बाकू खाने से भी रोज़ा जाता रहेगा, अगरचे पीक थूक दी हो के उसके बारीक अजज़ा ज़रूर हल्क़ में पहुंचते हैं। 

3️⃣ शकर वग़ैरह ऐसी चीज़ें जो मुंह में रखने से घुल जाती हैं, मुंह में रखी और थूक निगल गया रोज़ा जाता रहा। यूहीं दांतो के दरमियान कोई चीज़ चने के बराबर या ज़्यादा थी उसे खा गया या कम ही थी मगर मुंह से निकाल कर फिर खाली या दांतो से खून निकल कर हल्क़ से नीचे उतरा और खून थूक से ज़्यादा या बराबर था या कम था मगर उसका मज़ा हल्क़ में महसूस हुआ तो इन सब सूरतों में रोज़ा जाता रहा और अगर कम था और मज़ा भी महसूस ना हुआ तो नहीं। 

4️⃣ रोज़ा में दांत उखडवाया और ख़ून निकल कर हल्क़ से नीचे उतरा, अगरचे सोते में ऎसा हुआ तो उस रोज़ा की क़ज़ा वाजिब है।

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 5, सफ़ा 985 - 986 

🟣🟤 आगे जारी रहेगा.....

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Roza Todne Wali Chijon Ka Bayan Bahar E Shariat 
Part 1 

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