ज़िहाद के फ़ज़ाइल
➡ सौ(100) दरजात बुलंद
हुज़ूर सय्यदे आलम “ﷺ” ने इरशाद फ़रमाया की *जो अल्लाह के रब होने पर, इस्लाम के दीन होने पर, और मुहम्मद “ﷺ” के रसूल होने पर राजी हुआ उसके लिए जन्नत वाज़िब हो गई*
हज़रत अबु सईद खुदरी رضي الله عنه को ये बात पसंद आई अर्ज़ किया या रसूलल्लाह “ﷺ” एक बार फिर इरशाद फ़रमाएं चुनान्चे आप “ﷺ” ने दोबारा इरशाद फ़रमाया और फ़रमाया एक और अमल है जिस के सबब अल्लाह तआला बंदे के सौ दरजात बुलंद करता है और हर दरजात का दरमियानी फ़ासला ज़मीन व आसमान के बराबर होगा।
*हज़रत अबु सईद खुदरी رضي الله عنه ने अर्ज किया या रसूलल्लाह “ﷺ” वह कौन सा अमल है? आपने ने फ़रमाया राहे ख़ुदा में ज़िहाद करना ।*
📚मकाशिफतुल कुलुब
📚फैज़ान ए शरीअत, सफ़ा 1021
✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म कि रौशनी
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