शब ए क़द्र में पढ़ी जाने वाली चन्द नफ़्ल नमाज़े
1️⃣ शब ए क़द्र में *2 रक्अत नमाज़ पढ़े,* हर रक्अत में बाद *सुरह फ़ातिहा के सुरह इन्ना अनज़लना(सुरह क़द्र) 1 बार और सुरह इख़्लास 100 बार* बाद सलाम के *100 बार दुरुद शरीफ़ पढ़े।* सवाब ए अज़ीम हासिल हो।
2️⃣ चार रक्अत एक सलाम से पढ़े। हर रक्अत में *सुरह फ़ातिहा के बाद सुरह इन्ना अनज़लना(सूरह क़द्र) 1 बार और सुरह इख़्लास 27 बार।* अल्लाह तआला इस नमाज़ की बरकत से तमाम गुनाह माफ़ फ़रमाएगा और बहीश्ते मुअल्ला में मक़ाम अता फ़रमाएगा।
3️⃣ चार रक्अत पढ़े। हर रक्अत में *सुरह फ़ातिहा के बाद इन्ना अनज़लना(सूरह क़द्र) 3 बार सुरह इख़्लास 17 बार पढ़े।* अल्लाह तआला सकराते मौत आसान करेगा और अज़ाब ए क़ब्र दूर फ़रमाएगा।
4️⃣ सौ (100) रक्अत पढ़े । *2 - 2 की नियत* से हर रक्अत में *सुरह फ़ातिहा के बाद इन्ना अनज़लना(सूरह क़द्र) 3 बार, सुरह इख़्लास 10 बार पढ़े।* अल्लाह तआला इस नमाज़ के पढ़ने वाले को क़सरे जन्नत अता फ़रमाएगा ।
5️⃣ चार रक्अत एक सलाम से पढ़े। हर रक्अत में *सुरह फ़ातिहा के बाद इन्ना अनज़लना(सूरह क़द्र) 3 बार और सुरह इख़्लास 50 बार* बाद सलाम के *सज्दे में जा कर दुरुद शरीफ़ पढ़ कर जो दुआ मांगे क़ुबूल होगी।*
6️⃣ शब ए क़द्र में 2 रक्अत पढ़े ।हर रक्अत में *सुरह फ़ातिहा के बाद सुरह इन्ना अनज़लना(सूरह क़द्र) 7 बार और सुरह इख़्लास 7 बार पढ़े।* बाद फ़राग़त इस्तिग़फ़ार और दुरुद शरीफ़ पढ़े। अल्लाह तआला इस नमाज़ के पढ़ने वाले और उस के माँ बाप को बख़्श देगा।
7️⃣ शब ए क़द्र में क़रीब सुबहे सादिक़ *4 रक्अत एक सलाम से* पढ़े और हर रक्अत में *सुरह फ़ातिहा के बाद सुरह इन्ना अनज़लना(सूरह क़द्र) 3 बार और सुरह इख़्लास 5 बार पढ़े।* बाद ख़त्म नमाज़ सज्दा करे और सज्दा में जा कर
سبحان اللہ
41 बार कहे। अल्लाह तआला उस की तमाम हाजतें पुरी करेगा और दुआ मक़बूल होगी।
*शब ए क़द्र की दुआ*
*اللْهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي*
📚 तीन नुरानी रातें, सफ़ा 27 - 28
8️⃣ *इस रात सलातुत तसबीह ज़रूर पढ़ें* इसे पढ़ने का तरीक़ा *4 रक्अत, 1 सलाम से इस तरह अदा करें*......
पहले नियत कर के सना के बाद 15 मर्तबा *سُبْحَان اللهِ وَالْحَمْدُلِلّهِ وَلا إِلهَ إِلّااللّهُ وَاللّهُ أكْبَرُ* पढ़ें, उसके बाद *أَعـوذُ بِاللهِ* "और *بِسْمِ اللَّهِ* पढ़ें फ़िर *الْحَمْدُ لِلَّهِ* शरीफ़ पढ़ें उसके बाद *कोई और सुरत पढ़ कर 10 मर्तबा यही तसबीह पढ़ें*, फ़िर रुकुअ में *سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ* पढ़ने के बाद *10 बार फ़िर यही तसबीह पढ़ें*, रुकुअ से सर उठाने के *बाद फ़िर 10 बार यही तसबीह पढ़ें,* फ़िर पहले सज्दे में *سُبْحَانَ رَبِّيَ الأَعْلَى* के *बाद 10 बार फ़िर यही तसबीह पढ़ें,* फ़िर सज्दा से *सर उठा कर 10 बार यही तसबीह पढ़ें,* फ़िर दुसरे सज्दे में *سُبْحَانَ رَبِّيَ الأَعْلَى* के *बाद 10 बार फ़िर से यही तसबीह पढ़ें।* यानी 1 रक्अत में 75 बार तसबीह हुवी। इसी तरह 4 रक्अत अदा करें। 4 रक्अत में पुरे 300 बार तसबीह हो जाएगी। बाद फ़ारिग़ ए नमाज़ इसतिग़फ़ार, दुरुद शरीफ़ 100-100 बार पढ़ कर सज्दे में सर रख कर ख़ुदा ए तआला से नेक तौफ़िक़ की दुआ करें।
📚 तीन नुरानी रातें, सफ़ा 15
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चन्द ज़रूरी मसाइल.....
➡️ *बिला उज़र शरयी नमाज़ कज़ा कर देना बहुत सख़्त गुनाह है. उस पर फ़र्ज़ है कि उस की कज़ा पढ़े और सच्चे दिल से तोबा करे।*
📚क़ानून ए शरीअत, हिस्सा 1, सफ़ा 150
➡️ *कज़ा नमाज़ें नवाफ़िल से अहम हैं यानी जिस वक़्त नफ़्ल पढ़ता है उन्हें छोड़ कर उन के बदले कज़ाएं पढ़े ताकि बरीओ ज़िम्मा हो जाए।*
📚क़ानून ए शरीअत, हिस्सा 1, सफ़ा 153
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ज़्यादा से ज़्यादा कज़ा नमाज़ पढने की कोशिश करें
*जिस के ज़िम्मा बरसों की नमाज़ें कज़ा हों और ठीक याद ना हो कि कितने दिन से कोन - कोन कज़ा हुई, तो वह यूं निय्यत कर के पढ़े कि सबसे पहली फ़ज्र जो मुझ से कज़ा हुई उस को अदा करता हुँ या सब में पहली ज़ोहर, असर जिस की कज़ा पढ़ना चाहे उस की निय्यत करे और उसी तरह सब नमाज़ों की कज़ा पढ़ डाले। यहां तक के यक़ीन हो जाए कि सब अदा हो गए।*
📚क़ानून ए शरीअत, हिस्सा 1, सफ़ा 153
🔴🟢🔴 *दुनिया के हालात को देखते हुए आप सब बला व आफ़त से निजात पाने के लिए दुआ ज़रूर करें। और इस ग्रुप के तमाम मेम्बरान को अपने दुआ में याद रखें*🔴🟢🔴
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Shab E Qadr Mein Padhi Jane Wali Chand Nafl Namaze
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