शौहर का अपनी बीवी के जनाज़े को उठाने का मसअ्ला
अवाम में ये ग़लत मशहूर है कि शौहर *बीवी के मरने के बाद न देख सकता है न उस के जनाज़े को हाथ लगा सकता है और न कांधा दे सकता है* ।
*सहीह् बात ये है कि शौहर के लिए अपनी बीवी को मरने के बाद देखना भी जायज़ है और उस के जनाज़े को उठाना और कांधा देना, कब्र में उतारना भी जायज़ है।*
📚फ़तावा रज़वीया , जिल्द 4, सफ़ा 92
📚ग़लत फहमियाँ और उनकी इस्लाह , सफ़ा 43
✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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Galat Fahmiyan Aur Unki Islah
Maulana Tatheer Ahmad Razvi
ILM KI RAUSHNI
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