तरावीह का बयान
1️⃣ तरावीह मर्द व औरत सब के लिए बालाजम्अ सुन्नत ए मुअकिदह है इस का तर्क जायज़ नहीं। इस पर ख़ुलफ़ाए राशेदिन رضی اللہ تعالٰی عنہم ने मदावमत फ़रमाई और नबी “ﷺ” का इरशाद है :- कि मेरी सुन्नत और सुन्नत ए ख़ुलफ़ाए राशेदिन को अपने ऊपर लाज़िम समझो। और ख़ुद हुज़ूर “ﷺ” ने भी तरावीह पढ़ी और उसे बहुत पसंद फ़रमाया।
📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 4, सफ़ा 688
2️⃣हज़रते अबु हुरैरा رضي الله تعالیٰ عنه ने कहा कि रसूले करीम “ﷺ” ने फ़रमाया की जो शख़्स सिदक़ दिल और एतेक़ाद सही के साथ रमज़ान में क़याम करे यानी तरावीह पढ़े तो उसके अगले गुनाह बख़्श दिए जाते हैं।
📚मुस्लिम शरीफ़, जिल्द 1, सफ़ा 259
📚मिशक़ात शरीफ़, सफ़ा 114
3️⃣हज़रते साएब बिन यज़ीद رضي الله تعالیٰ عنه ने फ़रमाया हम सहाबा ए किराम हज़रते उमरे फ़ारुक़ ए आज़म رضي الله تعالیٰ عنه के ज़माना में बीस(20) रकअत (तरावीह) और वित्र पढ़ते थे।
📚बेहेक़ी , जिल्द 2, सफ़ा 699
4️⃣हज़रते यज़ीद बिन रूमान رضي الله تعالیٰ عنه ने फ़रमाया की हज़रत ए उमर رضي الله تعالیٰ عنه के ज़माने में लोग तेईस (23) रकअत पढ़ते थे।
(यानी बीस(20) रकअत तरावीह और तीन(3) रकअत वित्र)
📚इमाम मालिक, जिल्द 1, सफ़ा 115
📚अनवार उल हदीस, सफ़ा146
📚बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 4, सफ़ा 688
❤️💚❤️ इंशा अल्लाह आगे जारी रहेगा....
✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Taraweeh Ka Bayan (Bahar E Shariat)
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