Taraweeh Ka Bayan Part 3

तरावीह का बयान

पार्ट 3


1️⃣4️⃣ हर चार (4) रकअत पर इतनी देर तक बैठना मुस्तहब है जितनी देर में चार रकअत पढ़ें, पांचवें तरवीहा और वित्र के दरमियान अगर बैठना लोगों पर गिरां हो तो ना बैठे।

1️⃣5️⃣ इस बैठने में उसे इख़्तियार है कि चिपका बैठा रहे या कलमा पढ़े या तिलावत करे या दुरुद शरीफ़ पढ़े या चार रकअतें तन्हा नफ़्ल पढ़े जमाअत से मकरुह है या ये तसबीह पढ़े :- दुआ ए तरावीह 

*سُبْحَانَ ذِی الْمُلْکِ وَ الْمَلَکوتِ٭ سُبْحَانَ ذِی الْعِزَّۃِ وَ الْعَظَمَۃِ وَ الْھَیْبَۃِ وَالْقُدْرَۃِ وَ الکِبْرِیَاءِ وَالْجَبَرُوْتِ٭ سُبْحَانَ الْمَلِکِ الْحَیِّ الَّذِیْ لَاْیَنَامُ وَلَایَمُوْتُ٭ سُبُّوْحٌ قُدُّوْسٌ رَبُّنَا وَرَبُّ الْمَلِٰکَۃِ وَالرُّوْحِ٭ اَللّٰھُمَّ اَجِرْنَا مِنَ النَّارِ یَا مُجِیْرُ یَا مُجِیْرُ یَا مُجِیْرُ•*


1️⃣6️⃣ हर दो (2) रकअत के बाद दो रकअत पढ़ना मकरुह है। युंही दस (10) रकअत के बाद बैठना भी मकरुह।

1️⃣7️⃣ तरावीह में जमाअत सुन्नते कफ़ाया है कि अगर मस्जिद के सब लोग छोड देंगे तो सब गुनहगार होंगे और अगर किसी एक ने भी घर में तन्हा पढ़ ली तो गुनहगार नहीं मगर जो शख़्स मुक़्तदा हो कि उस के होने से जमाअत बड़ी होती है और छोड़ देगा तो लोग कम हो जाएंगे उसे बिला उज़्र जमाअत छोडने की इजाज़त नहीं।

1️⃣8️⃣ तरावीह मस्जिद में बा जमाअत पढ़ना अफ़ज़ल है अगर घर में जमाअत से पढ़ी तो जमाअत के तर्क का गुनाह ना हुआ मगर वह सवाब ना मिलेगा जो मस्जिद में पढ़ने का था।

1️⃣9️⃣ अगर आलीम हाफ़िज़ भी हो तो अफ़ज़ल ये है कि ख़ुद पढ़े दूसरे की इक़्तदा ना करे और अगर इमाम ग़लत पढ़ता हो तो मस्जिद मोहल्ला छोड़ कर दूसरी मस्जिद में जाने में हर्ज नहीं। युंही अगर दूसरी जगह का इमाम ख़ुश आवाज़ हो या हल्की क़िराअत पढ़ता हो या मस्जिद मोहल्ला में ख़त्म ना होगा तो दूसरी मस्जिद में जाना जायज़ है।

2️⃣0️⃣ ख़ुश ख़्वान को इमाम बनाना ना चाहिए बल्कि दुरुस्त ख़्वान को बनाएं। अफ़सोस सद अफ़सोस कि इस ज़माने में हुफ़्फ़ाज़ की हालत निहायत ना गुफ़्तबह् है। अक्सर तो ऐसा हैं कि یعلمون تعلمون के सिवा कुछ पता नहीं चलता अलफ़ाज व हरुफ़ खा जाया करते हैं जो अच्छा पढ़ने वाले कहे जाते हैं उन्हें देखिए तो हरुफ़ सही नहीं अदा करते ء ، ا ، ع  और  ذ،  ز ،ظ  और  ث، س، ص، ت، ط  वगैरह हरुफ़ में फ़र्क़ नहीं करते जिस से क़तअन नमाज़ ही नहीं होती फ़क़ीर को इन्हीं मुसीबतों की वजह से तीन साल ख़त्म क़ुरआन मजीद सुनना ना मिला। मौला ﷻ मुसलमान भाइयों को तोफ़िक़ दे कि ما انزل اللہ पढ़ने की कोशिश करें।

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 4, सफ़ा 690 - 692

✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Taraweeh Ka Bayan Part 3

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