Taraweeh Ka Bayan Part 4

तरावीह का बयान

पार्ट 4


2️⃣1️⃣ एक इमाम दो मस्जिद में तरावीह पढ़ाता है अगर दोनों में पूरी - पूरी पढ़ाए तो नाजायज़ है और मुक़तदी ने दो मस्जिदों में पूरी - पूरी पढ़ी तो हर्ज नहीं मगर दूसरी में वित्र पढ़ना जायज़ नहीं जब कि पहली में पढ़ चुका और अगर घर में तरावीह पढ़ कर मस्जिद में आया और इमामत की तो मकरुह है।

2️⃣2️⃣ लोगों ने तरावीह पढ़ ली अब दुबारा पढ़ना चाहते हैं तो तन्हा - तन्हा पढ़ सकते हैं जमाअत की इजाज़त नहीं।

2️⃣3️⃣ अफ़ज़ल ये है कि एक इमाम के पीछे तरावीह पढ़ें और दो के पीछे पढ़ना चाहें तो बेहतर ये है कि पूरे तरवीहा पर इमाम बदलें, मसलन आठ (8) एक के पीछे और बारह (12) दूसरे के।

2️⃣4️⃣ नाबालिग़ के पीछे बालीग़ैन की तरावीह ना होगी यही सही है।

2️⃣5️⃣ रमज़ान शरीफ़ में वित्र जमाअत के साथ पढ़ना अफ़ज़ल है ख़्वाह उसी इमाम के पीछे जिसके पीछे ईशा व तरावीह पढ़ी या दुसरे के पीछे।

2️⃣6️⃣ ये जायज़ है कि एक शख़्स ईशा व वित्र पढ़ाए दूसरा तरावीह। जैसा कि हज़रत ए उमर رضی اللہ تعالٰی عنہ ईशा व वित्र की इमामत करते थे और अबी बिन काअब رضی اللہ تعالٰی عنہ तरावीह की ।

2️⃣7️⃣ अगर सब लोगों ने ईशा की जमाअत तर्क कर दी तो तरावीह भी जमाअत से ना पढ़े, हाँ ईशा जमाअत से हुई और बाअज़ को जमाअत ना मिली तो ये जमाअत ए तरावीह में शरीक़ हों।

2️⃣8️⃣ अगर ईशा जमाअत से पढ़ी और तरावीह तन्हा तो वित्र की जमाअत में शरीक हो सकता है और अगर ईशा तन्हा पढ़ ली अगरचे तरावीह बा जमाअत पढ़ी तो वित्र तन्हा पढ़े।

2️⃣9️⃣ ईशा की सुन्नतों का सलाम ना फ़ैरा उसी में तरावीह मिला कर शुरू की तो तरावीह नहीं हुई।

3️⃣0️⃣ तरावीह बैठ कर पढ़ना बिला उज़्र मकरुह है, बल्कि बाअज़ों के नज़दीक तो होगी ही नहीं।

3️⃣1️⃣ मुक़तदी को ये जायज़ नहीं कि बैठा रहे जब इमाम रुकुअ करने को हो तो खड़ा हो जाए कि ये मुनाफ़िक़ीन से मुशाबिहत है।

3️⃣2️⃣ इमाम से ग़लती हुई कोई सूरत या आयत छूट गई तो मुस्तहब ये है कि उसे पहले पढ़ कर फ़िर आगे बढ़े।

3️⃣3️⃣ दो (2) रकअत पर बैठना भूल गया तो जब तक तीसरी (3) का सजदा ना किया हो बैठ जाए और सजदा कर लिया हो तो चार (4) पूरी कर ले मगर ये दो (2) शुमार की जाएगी और जो दो (2) पर बैठ चुका है तो चार (4) हुवें।

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 4, सफ़ा 692 - 694

✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Taraweeh Ka Bayan Part 4

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