तरावीह का बयान
पार्ट 5
3️⃣4️⃣ तीन रकअत पढ़ कर सलाम फ़ेरा, अगर दूसरी पर बैठा ना था तो ना हुएं उन के बदले की दो रकअत फ़िर पढ़े।
3️⃣5️⃣ क़अदह में मुक़तदी सो गया इमाम सलाम फ़ेर कर और दो (2) रकअत पढ़ कर क़अदह में आया अब ये बेदार हुआ तो अगर मालूम हो गया तो सलाम फ़ेर कर शामिल हो जाए और इमाम के सलाम फ़ेरने के बाद जल्द पूरी कर के इमाम के साथ हो जाए।
3️⃣6️⃣ वित्र पढ़ने के बाद लोगों को याद आया कि दो (2) रकअतें रह गयीं तो जमाअत से पढ़ लें और आज याद आया कि कल दो (2) रकअतें रह गयीं थीं तो जमाअत से पढ़ना मकरुह है।
3️⃣7️⃣ सलाम फ़ेरने के बाद कोई कहता है दो हुएं कोई कहता है तीन तो इमाम के इल्म में जो हो उस का एतबार है और इमाम को किसी बात का यक़ीन ना हो तो जिस को सच्चा जनता हो उस का क़ौल एतबार करे। अगर उस में लोगों को शक़ हो कि बीस (20) हुएं या अठारह (18) तो दो रकअत तन्हा - तन्हा पढ़ें।
3️⃣8️⃣ अगर किसी वजह से नमाज़ ए तरावीह फ़ासिद हो जाए तो जितना क़ुरआन मजीद उन रकअतों में पढ़ा है आदह (अदा) करें ताकि ख़त्म में नुक़सान ना रहे।
3️⃣9️⃣ अगर किसी वजह से ख़त्म ना हो तो सूरतों की तरावीह पढ़ें और उस के लिए बअज़ों ने ये तरीक़ा रखा है कि الم تر کیف से आख़िर तक दो बार पढ़ने में बीस (20) रकअतें हो जाएंगी।
4️⃣0️⃣ एक बार بسم اللہ शरीफ़ जहर (ऊंची आवाज़) से पढ़ना सुन्नत है और हर सूरत की इबतदा में आहिस्ता पढ़ना मुस्तहब और ये जो आज कल बअज़ जहाल ने निकाला है कि 114 बार بسم اللہ जहर से पढ़ी जाए वरना ख़त्म ना होगा, मज़हब ए हनफ़ी में बे अस्ल है।
4️⃣1️⃣ मुताख़िरीन ने ख़त्म तरावीह में तीन बार قل ھواللہ पढ़ना मुस्तहब कहा और बेहतर ये है कि ख़त्म के दिन पिछली रकअत में الم से مفلحون तक पढ़े।
4️⃣2️⃣ शबीना के एक रात की तरावीह में पूरा क़ुरआन पढ़ा जाता है, जिस तरह आज कल रिवाज है कि कोई बैठा बातें कर रहा है, कुछ लोग चाय पीने में मशग़ूल हैं, कुछ लोग मस्जिद के बाहर हुक़्क़ा नौशी कर रहे हैं और जब जी में आया एक आध रकअत में शामिल भी हो गए ये नाजायज़ है।
❤️💚❤️ *फ़ायदा :-* हमारे इमाम ए आज़म رضی اللہ تعالٰی عنہ रमज़ान शरीफ़ में इकसठ (61) ख़त्म किया करते थे। तीस (30) दिन में और तीस रात में और एक तरावीह में और पैन्तालीस (45) बरस ईशा के वज़ु से नमाज़ ए फ़ज्र पढ़ी है।
📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 4, सफ़ा 694 - 695
अलहमदुलिल्लाह तरावीह का बयान मुकम्मल हुआ।
✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Taraweeh Ka Bayan Part 5
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