Taraweeh Ka Bayan Part 2

तरावीह का बयान

पार्ट 2

5️⃣ मुस्तहब ये है कि तिहाई रात तक ताख़ीर करें और आधी रात के बाद पढ़ें तो भी कराहत नहीं।

6️⃣ अगर फ़ौत हो जाए तो उनकी कज़ा नहीं और अगर कज़ा तन्हा पढ़ ली तो तरावीह नहीं बल्कि नफ़्ल मुस्तहब हैं। जैसे मग़रिब व ईशा की सुन्नतें।

7️⃣ तरावीह की बीस(20) रकअतें दस(10) सलाम से पढ़े यानी हर रकअत पर सलाम फ़ेरे और अगर किसी ने बीसों पढ़ कर आख़िर में सलाम फ़ेरा तो अगर हर दो  रकअत पर क़ाअदा करता रहा तो हो जाएगी मगर कराहत के साथ और क़ाअदा न किया था तो दो रकअत के क़ायम मक़ाम हुए।

8️⃣ एहतियात ये है कि जब दो - दो रकअत पर सलाम फ़ेरे तो हर दो रकअत पर अलग - अलग नियत करे और अगर एक साथ बीसों (20) रकअत की नियत कर ली तो भी जायज़ है।

9️⃣ तरावीह में एक बार क़ुरआन मजीद ख़त्म करना सुन्नते मोअकीदा है और दो मर्तबा फ़ज़ीलत और तीन मर्तबा अफ़ज़ल। लोगों की सुस्ती की वजह से ख़त्म को तर्क न करे।

🔟 इमाम व मुक़तदी हर दो रकअत पर सना पढ़ें और बाद तशहुद दुआ भी, हाँ अगर मुक़तदीयों पर गिरानी हो तो तशहुद के बाद  اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَآلِهِ पर इक़तीफ़ा करे।

1️⃣1️⃣ अगर एक ख़त्म करना हो तो बेहतर ये है कि सत्ताईसवीं (27) शब में ख़त्म हो फ़िर अगर उस रात में या उसके पहले ख़त्म हो तो तरावीह आख़िर रमज़ान तक बराबर पढ़ते रहें कि सुन्नते मोअकीदा हैं।

1️⃣2️⃣ अफ़ज़ल ये है कि तमाम शफ़ओं में क़िराअत बराबर हो और अगर ऎसा ना किया जब भी हर्ज नहीं। युंही हर शफ़अ की पहली रकअत और दुसरी की क़िराअत मसावी हो दुसरी की क़िराअत पहली से ज़्यादा ना होना चाहिए। 

1️⃣3️⃣ क़िराअत और अरकान की अदा में जल्दी करना मकरूह है और जितनी तरतील ज़्यादा हो बेहतर है। यूँही ताअ्उज़ व तस्मिया व तमानीनत व तस्बीह का छोड़ देना भी मकरूह है।

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 4, सफ़ा 689 - 690

❤️💚❤️ इन्शा अल्लाह आगे जारी रहेगा....

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Taraweeh Ka Bayan Part 2

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