रमज़ान का तोहफ़ा पार्ट 9
📝 तरावीह की नमाज़ से मुत्अल्लिक़ कुछ ज़रूरी बातें
➡️ रमज़ान की रातों में बीस रकअत तरवीह की नमाज़ इशा के फ़र्ज़ के बाद मर्द और औरतों के लिये सुन्नत ए मुअकिदा है जो छोड़ने की आदत डाले वह गुनाहगार है कभी कभार छूट जाने में गुनाह नहीं और उसकी जमाअत सुन्नत ए किफ़ाया है अगर सब लोग घरों में पढ़ें मस्जिद में जमाअत ही न हो तो सब गुनाहगार होंगे और अक्सर लोग मस्जिद में जमाअत से अदा करें और कोई शख़्स घर में पढ़े तो वह गुनाहगार नहीं लेकिन पांचों वक़्त फज्र व ज़ोहर असर व मग़रिब व इशा की। नमाज़ की अदाएगी मज़हबे इस्लाम में सबसे अहम फ़रीज़ा है। एक वक़्त की नमाज़ छोड़ना भी बड़ा हराम है और वे वजह जमाअत छोड़ने की आदत भी गुनाहे कबीरा व हराम है।
कुछ लोग कहते हैं कि तरावीह पढ़े तो पूरी रोज़ाना महीने भर या फिर किसी दिन न पढ़े और पाबन्दी न कर पाने की वजह से बिल्कुल नहीं पढ़ते तो ये उनकी ग़लत फ़हमी नादानी और जिहालत है सही बात यह है कि जिस दिन पढ़ी जाएगी उस दिन का सवाब। मिलेगा और जिस दिन नहीं पढ़ी उस दिन का सवाब नहीं मिलेगा। और बे मजबूरी छोड़ने की आदत डाले तो गुनाहगार होगा।
औरतों के लिये भी तरावीह सुन्नत ए मुअकिदा है लेकिन इन्हें मस्जिदों में जाने की इजाज़त नहीं घरों में अदा करें जमाअत भी कर सकती हैं लेकिन औरत इमामत न करे कोई मर्द करे जब कि उस जमाअत से मस्जिद की जमाअत पर ख़ास फ़र्क़ न पड़े और जमाअत में अगर मर्द, बच्चे और औरतें सब हों तो इमाम के पीछे मर्द फिर बच्चे फिर औरतें खड़ी हों। सिर्फ़ औरतों की इमाम अगर औरत हो। तब भी नमाज़ हो जाएगी लेकिन कराहत के साथ।
कुछ लोग रमज़ान में शुरू के चन्द दिनों में हाफ़िज़ से तरावीह में पूरा क़ुरआन सुन-लेते हैं और फ़िर बाक़ी दिनों तरावीह के वक़्त आज़ाद घूमते हैं यह एक ग़लत तरीक़ा और रिवाज़ है उन पर बाक़ी दिनों की तरावीह छोड़ने का वबाल रहेगा। तरावीह में सिर्फ़ क़ुरआन सुनना पढ़ना ही सुन्नत नहीं बल्कि पूरे महीने तरावीह पढ़ना भी सुन्नत है और कई कई पारे एक दिन में पढ़कर चन्द दिनों में क़ुरआन ख़त्म कर देना भी मुनासिब नहीं बेहतर और मुनासिब तरीक़ा यही है कि एक पारे से कुछ ज़्यादा रोज़ाना पढ़ते रहें और सत्ताईसवीं शब में क़ुरआन ख़त्म करें। इसी में हिकमत मसलेहत है। और यही साहाबा-ए-किराम से मरवी है।
✍️ मौलाना तत्हीर अहमद रज़वी बरेलवी
📚 रमज़ान का तोहफ़ा सफ़ा 12,13,14
✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Taraweeh Ki Namaz Se Mutalliq Kuchh Zaroori Baten
Ramzan Ka Tohfa Part 9
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