ताज़िया पर चढ़ावा चढ़ाना कैसा ?
➡आला हज़रत इमाम अहले सुन्नत हुज़ूर इमाम अहमद रज़ा खां मुहद्दिस ए बरैलवी अलैहि रहमां फ़रमाते हैं कि ताज़िया पर चढ़ावा चढ़ाना नाजायज़ है और फिर उस चढ़ावे को खाना भी नाजायज़ है।
📚फ़तावा रज़वीया , जिल्द 21 ,सफ़ा 246 .
➡ताज़िया का चढ़ावा नाजायज़ बिदअत व गुनाह है ।
📚फ़तावा रज़वीया जिल्द 9 , सफ़ा 165
📚ख़ुतबात ए मुहर्रम सफ़ा 467
✍🏻✍🏻फ़क़िह ए मिल्लत
➡फातिहा जायज़ है रोटी, शिर्नी, शर्बत जिस चीज़ पर हो, मगर ताज़िये पर रख कर या उसके सामने होना जहालत है। और उस पर चढ़ाने के सबब तबरुक समझना हिमाकत (बेवकूफ़ी ) है। हां ताज़िया से जुदा जो ख़ालीस सच्ची नियत से हज़रात ए शोहदा ए किराम रदिअल्लाहु अन्हुम की फातिहा की वह ज़रूर तबरुक है।
📚फ़तावा रज़वीया जिल्द 24 सफ़ा 499
✒✒मिन जानिब:-मेम्बरान इल्म की रौशनी
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