ताज़िया दारी में इमदाद करना कैसा ?
➡ताज़िया दारी में किसी क़िस्म की इमदाद जायज़ नहीं ।
(इमदाद करने वाला भी गुनाहगार होगा)
क्योंकि ये राफ़ज़ीयों का तरीक़ा है। ताज़िया को जाइज़ समझ कर बनाना ये फ़ासीक़ों का तरीक़ा है ।
📚फ़तावा रज़विया जिल्द 10 , सफ़ा 471/472 .
➡हुज़ूर अब्दुल अज़ीज़ मुहद्दिस ए देहलवी अलैहि रहमां फ़रमाते हैं कि ताज़िया में मदद करना जाइज़ नहीं है ,इसलिए कि गुनाह पर मदद है और गुनाह पर मदद जाइज़ नहीं ।
📚फ़तावा अज़ीज़िया , जिल्द 1 ,सफ़ा 76 .
➡हुज़ूर मुफ़्ती ए आज़म ए हिन्द मुस्तफ़ा रज़ा खां अलैहि रहमा फ़रमाते हैं कि ताज़िया दारी जो शरअन नाजायज़ है उसके लिए जबरन चंदा लेना किस क़दर बुरी बात है ।
📚फ़तावा मुस्तफ़वीया , सफ़ा 534 .
✒✒ मिन जानिब :- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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