Taziyadari Mein Tamasha Dekhna Kaisa?

ताज़ियादारी में तमाशा देखना कैसा है??

➡आला हज़रत इमाम अहले सुन्नत हुज़ूर इमाम अहमद रज़ा खां मुहद्दिस ए बरैलवी अलैहि रहमां फ़रमाते हैं कि चुन्के ताज़िया बनाना नाजायज़ है, लिहाज़ा नाजायज़ बात का तमाशा देखना भी नाजायज़ है।
📚मलफुज़ात ए आला हज़रत सफ़ा 286

➡ये सब महज़ ख़ुरेफात हैं इन सब से हज़रत ए इमाम हुसैन रदिअल्लाहु अन्हो ख़ुश नहीं हैं ।
शहादत का वाक़्या तुम्हारे लिए नसीहत था और तुमने उसको खेल तमाशा बना लिया ।
📚बहार ए शरीयत 16 हिस्सा सफ़ा 248

➡ये काम मुजववेज़ह रवाफ़िज की नक़्ल है कुफ्फारो मुरतिदीन की नक़्ल है।
इमाम हुसैन रदिअल्लाहु अन्हो कि यादगार ये खेलकूद नहीं, बल्कि उनकी यादगार पाबंदी ए नमाज़, उस दिन रोज़ा, सदक़ा ख़ैरात है, हां अगर सही नक़्शा तैयार किया जाए बिला शुबह जायज़ है।
📚फ़तावा नईमिया सफ़ा 191

✒✒ मिन जानिब :- मेम्बरान इल्म की रौशनी

Follow this link to join my WhatsApp group: https://chat.whatsapp.com/HQjyRmPHzDnKmLU9POb7Fp

Post a Comment

0 Comments