Un Chijon Ka Bayan Jin Se Roza Nahi Jata Part 1

उन चीज़ों का बयान जिन से रोज़ा नहीं जाता

पार्ट 1

🟣 पहले चन्द हदीस शरीफ़ ⤵️⤵️

1️⃣ सही बुख़ारी व सही मुस्लिम में अबु हुरैरा رضی اللہ تعالٰی عنہ से मरवी, रसूल अल्लाह “ﷺ” फ़रमाते हैं :- जिस रोज़ादार ने भूल कर खाया या पीया, वह अपने रोज़ा को पूरा करे कि उसे अल्लाह ﷻ ने खिलाया और पिलाया। 

2️⃣ अबु दाउद व तिर्मिज़ी व इब्न ए माजा व दारमी अबु हुरैरा رضی اللہ تعالٰی عنہ से रावी, कि रसूल अल्लाह “ﷺ” ने फरमाया :- जिस पर क़ैय (उलटी) ने ग़ल्बा किया, उस पर कज़ा नहीं और जिसने कसदन क़ैय की, उस पर रोज़ा की कज़ा है। 

3️⃣ तिर्मिज़ी अन्स رضی اللہ تعالٰی عنہ से रावी, कि एक शख़्स ने ख़िदमत ए अक़दस में हाज़िर हो कर अर्ज़ की, मेरी आंख में मर्ज़ है, क्या रोज़ा की हालत में सूरमा लगाऊँ ? फरमाया :-  हाँ। 

4️⃣ तिर्मिज़ी अबु सईद رضی اللہ تعالٰی عنہ से रावी, कि रसूल अल्लाह “ﷺ” ने फरमाया :- तीन (3) चीज़ें रोज़ा नहीं तोड़ती, पछना और क़ैय और एहतलाम। 

➡️ *तंबीह :-* इस बात में उन चीज़ों का बयान है, जिन से रोज़ा नहीं टूटता। रहा ये अम्र कि उनसे रोज़ा मकरुह भी होता है या नहीं उससे इस बाब को ताल्लुक़ नहीं, न यह कि वह फेल जायज़ है या नाजायज़। 

🟣🟤🟡 *मसाइल* ⤵️

1️⃣ भूल कर खाया या पीया या जिम्आ किया रोज़ा फ़ासिद न हुआ। ख़्वाह वो रोज़ा फ़र्ज़ हो या नफ़्ल और रोज़ा की नियत से पहले यह चीज़ें पाई गयीं या बाद में, मगर जब याद दिलाने पर भी याद न आया कि रोज़ादार है तो अब फ़ासिद हो जाएगा, बशर्ते कि याद दिलाने के बाद ये अफ़आल वाक़ई हुए हों मगर इस सूरत में कफ्फ़ारा लाज़िम नहीं। 

2️⃣ किसी रोज़ादार को उन अफ़आल में देखे तो याद दिलाना वाजिब है, याद न दिलाया तो गुनहगार हुआ, मगर जबकि वह रोज़ादार बहुत कमज़ोर हो कि याद दिलाएगा तो वह खाना छोड़ देगा और कमज़ोरी इतनी बढ़ जाएगी कि रोज़ा रखना दुशवार होगा और खा लेगा तो रोज़ा भी अच्छी तरह पूरा कर लेगा और दीगर इबादतें भी बख़ूबी अदा कर लेगा तो इस सूरत में याद न दिलाना बेहतर है। 
              बाअज़् मशाइख़ ने कहा जवान को देखे तो याद दिला दे और बुढ़े को देखे तो याद न दिलाने में हर्ज़ नहीं। मगर यह हुक्म अक्सर के लिहाज़ से है कि जवान अक्सर क़वी होते हैं और बुढ़े अक्सर कमज़ोर और अस्ल हुक्म यह है कि जवानी और बुढ़ापे को कोई दख़ल नहीं, बल्कि क़ुव्वत व ज़इफ़ का लिहाज़ है, लिहाज़ा अगर जवान इस क़दर कमज़ोर हो तो याद न दिलाने में हर्ज़ नहीं और बुढ़ा कवी हो तो याद दिलाना वाजिब।

3️⃣ मख्खी या धुआं या ग़ुबार हल्क़ में जाने से रोज़ा नहीं टूटता। ख़्वाह वह ग़ुबार आंटे का हो कि चक्की पीसने या छानने में उड़ता है या ग़ल्ला का ग़ुबार हो या हवा से ख़ाक उड़ी या जानवरों के खुर या टाप से ग़ुबार उड़ कर हल्क़ में पहुंचा, अगरचे रोज़ादार होना याद था और अगर ख़ुद क़सदन धुंआ पहुंचाया तो फ़ासिद हो गया जबकि रोज़ादार होना याद हो, ख़्वाह वह किसी चीज़ का धुंआ हो और किसी तरह पहुंचाया हो, यहां तक कि अगरबत्ती वग़ैरह ख़ुशबु सुलगती थी, उस ने मुँह क़रीब कर के धुंए को नाक से खिंचा रोज़ा जाता रहा। यूंही हुक़्क़ा पीने से भी रोज़ा टूट जाता है, अगर रोज़ा याद हो और हुक़्क़ा पीने वाला अगर पीएगा तो कफ़्फ़ारा भी लाज़िम आएगा।

4️⃣ भरी संगी लगवाई या तेल या सूरमा लगाया तो रोज़ा ना गया, अगरचे तेल या सूरमा का मज़ा हल्क़ में महसूस होता हो बल्कि थूक में सूरमा का रंग भी दिखाई देता हो, जब भी नहीं टूटा।

5️⃣ बोसा लिया मगर इन्ज़ाल ना हुआ तो रोज़ा नहीं टूटा। यूंही औरत की तरफ़ बल्कि उस की शर्मगाह की तरफ़ नज़र की मगर हांथ ना लगाया और इन्ज़ाल हो गया, अगरचे बार - बार नज़र करने या जिमाअ वग़ैरह के ख़्याल करने से इन्ज़ाल हुआ, अगरचे देर तक ख़्याल जमाने से ऎसा हुआ हो उन सब सुरतों में रोज़ा नहीं टूटा।

6️⃣ ग़ुस्ल किया और पानी की ठंढक अंदर महसूस हुई या कुल्ली की और पानी बिल्कुल फ़ेंक दिया सिर्फ़ कुछ तरी मुँह में बाक़ी रह गई, थूक के साथ उसे निगल गया या दवा कुटी और हल्क़ में उसका मज़ा महसूस हुआ या हुटर (एक दवा का नाम) चुसी और थूक निगल गया, मगर थूक के साथ हुटर का कोई जुज़ हल्क़ में ना पहुँचाया कान में पानी चला गया या तिनके से कान खुजाया और उस पर कान का मैल लग गया फ़िर वही मैल लगा हुआ इतना कान में डाला, अगरचे चंद बार किया हो या दांत या मुँह में खफ़ीफ़ चीज़ बे मालूम सी रह गई कि लुवाब के साथ ख़ुद ही उतर जाएगी और वह उतर गई या दांतों से ख़ून निकल कर हल्क़ तक पहुंचा, मगर हल्क़ से नीचे ना उतरा तो इन सब सूरतों में रोज़ा ना गया।

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 5, सफ़ा 980 - 983

🟣🟡🟤 इंशा अल्लाह आगे जारी रहेगा......

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Bahar E Shariat
Part 1

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