Un Sooraton Ka Bayan Jinme Kaffara Bhi Lazim Hai, Masail Part 2

उन सूरतों का बयान जिनमें कफ़्फ़ारा भी लाज़िम है, मसाइल 

पार्ट 2

7️⃣ कफ़्फ़ारा वाजिब होने के लिए भरपेट खाना ज़रूरी नहीं थोड़ा सा खाने से भी वाजिब हो जाएगा। 

8️⃣ तेल लगाया या ग़ीबत की फ़िर ये गुमान कर लिया कि रोज़ा जाता रहा या किसी आलिम ही ने रोज़ा जाने का फ़तवा दे दिया अब उसने खा पी लिया जब भी कफ़्फ़ारा लाज़िम है। 

9️⃣ क़ैय (उल्टी) आई या भूलकर खाया या पिया या जिमा (हमबिस्तरी) किया और इन सब सूरतों मैं उसे मालूम था कि रोज़ा ना गया फ़िर उसके बाद खा लिया तो कफ़्फ़ारा लाज़िम नहीं और अगर एहतिलाम हुआ और उसे मालूम था कि रोज़ा ना गया फ़िर खा लिया तो कफ़्फ़ारा लाज़िम है। 

1️⃣0️⃣ लुआब थूक कर चाट गया या दूसरे का थूक निगल गया तो कफ़्फ़ारा नहीं मगर महबूब का लज़्ज़त या मुअज़्ज़मे दीनी (बुज़ुर्ग) का तबर्रुक के लिए थूक निगल गया तो कफ़्फ़रा लाज़िम है। 

1️⃣1️⃣ जिन सूरतों में रोज़ा तोड़ने पर कफ़्फ़ारा लाज़िम नहीं उनमें शर्त है कि एक ही बार ऐसा हुआ हो और मअसियत (गुनाह) का क़स्द (इरादा) ना किया हो, वरना उनमें कफ़्फ़ारा देना होगा। 

1️⃣2️⃣ कच्चा गोश्त खाया अगरचे मुर्दार का हो तो कफ्फ़ारा लाज़िम है मगर जबके सड़ा हो या उसमें कीड़े पड़ गए हों तो कफ़्फ़ारा नहीं। 

1️⃣3️⃣ मिट्टी खाने से कफ़्फ़ारा वाजिब नहीं मगर गुले अरमनी या वो मिट्टी जिसके खाने की उसे आदत है खाई तो कफ़्फ़ारा वाजिब है और नमक अगर थोड़ा खाया तो कफ़्फ़ारा वाजिब है ज़्यादा खाया तो नहीं। 

1️⃣4️⃣ नजिस (नापाक) शोरबे में रोटी भिगोकर खाई या किसी की कोई चीज़ ग़सब करके खाई तो कफ़्फ़ारा वाजिब है और थूक में ख़ून था अगरचे ख़ून ग़ालिब हो निगल लिया या ख़ून पी लिया तो कफ़्फ़रा नहीं। 

1️⃣5️⃣ कच्ची बिही (ये एक फ़ल का नाम है) खाई या पिस्ता या अख़रोट मुसल्लम (साबुत) या ख़ुश्क या बादाम मुसल्लम निगल लिया या छिलके समेत अंडा या छिलके के साथ अनार खा लिया तो कफ़्फ़ारा नहीं और ख़ुश्क पिस्ता या ख़ुश्क बादाम अगर चबाकर खाया और उसमें मग़्ज़ भी हो तो कफ़्फ़ारा है और मुसल्लम (साबुत) निगल लिया हो तो नहीं अगरचे फटा हो और तर बादाम मुसल्लम निगलने में भी कफ़्फ़ारा हैं। 

1️⃣6️⃣ चने का साग खाया तो कफ़्फ़ारा वाजिब, यही हुक्म दरख़्त (पेड़) के पत्तों का है जब के खाए जाते हों वरना नहीं। 

1️⃣7️⃣ ख़रपज़ा (ख़रबूज़ा) या तरबज़ (तरबूज़) का छिलका खाया, अगर ख़ुश्क हो या ऐसा हो कि लोग उसके खाने से घिन करते हों तो कफ़्फ़ारा नहीं वरना है। कच्चे चावल, बाज़रा, मसूर, मूंग खाई तो कफ़्फ़ारा नहीं, यही हुक्म कच्चे जौ का है और भुने हुए हों तो कफ़्फ़ारा लाज़िम। 

1️⃣8️⃣ तिल या तिल के बराबर खाने की कोई चीज़ बाहर से मुंह में डालकर बग़ैर चबाए निगल गया तो रोज़ा गया और कफ़्फ़ारा वाजिब। 

1️⃣9️⃣ दूसरे ने निवाला चबाकर दिया उसने खा लिया या उसने ख़ुद अपने मुंह से निकाल कर खा लिया तो कफ़्फ़ारा नहीं। 

बशर्ते कि उसके चबाए हुए को लज़्ज़त या तबर्रुक ना समझता हो। 

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 5, सफ़ा 992 - 994

🟣 आगे जारी रहेगा.......

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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