मुहर्रम में क्या जाइज़? क्या नाजाइज़?
(पार्ट 16)
📋 बरेली शरीफ़ की ताज़ियेदारी......2
रही ये बात कि बरेली शरीफ़ में ताज़ियादारी कब से शुरू हुई तो क़िस्सा ये है :-
कि अब से तक़रीबन 250 साल पहले बरेली शरीफ़ और रोहेलखण्ड का सारा इलाक़ा नवाब हाफ़िज़ रहमत खां رحمۃ اللہ علیہ के ज़ेरे इक़्तिदार था अंग्रेज़ उनसे घबराते थे, कई लड़ाइयों में उनके मुक़ाबिल से अंग्रेज़ हार कर भागे थे, लेकिन 1774 ईसवी की जंग जो मीरानपुर कटरा के नज़दीक लड़ी गई थी लखनऊ के राफ़ज़ी नवाब ने हाफ़िज़ रहमत खां साहब رحمۃ اللہ علیہ के मुक़ाबिले पर अंग्रेजों का साथ दिया हाफ़िज़ रहमत खां साहब رحمۃ اللہ علیہ बड़ी बहादुरी से लड़े आख़िरकार शहीद हुए और और अंग्रेजों की मेहरबानी से बरेली का कुछ इलाक़ा कुछ सालों के लिए लखनऊ के राफ़ज़ी नवाब के ज़ेरे हुक़ूमत आ गया, राफ़ज़ियत का दौर दौरा शुरू हुआ इमामबाड़े बनें नवाब आसिफ़ुद्दौला के नाम पर बड़े बाज़ार में लबे सड़क शियाओं की आस्फ़िया मस्जिद बनाई गई जो अब भी है, क़ुदरती तौर पर उसका एक मीनार ऊपर से आधा टूट गया है।
राफ़ज़ियत के असरात से इसी दौर में ताज़ियादारी शुरू हुई, और यहाँ तक ज़ोर बढ़ा की किले वाली जामा मस्जिद की सेहदरी तक ताज़िये रख दिये गए, और मस्जिद के इस हिस्से को इमामबाड़ा कहा जाने लगा ये राफ़ज़ी हुक़ूमत के असर से हुआ।
ये आला हज़रात के दादा बुज़ुर्गवार इमामुलउलमा मौलाना रज़ा अली खां علیہ الرحمہ का ज़माना था उन्होंने इस सब के ख़िलाफ़ बहुत सख़्त फ़तवा दिया, यहाँ तक कि हुक़ूमत की परवाह किये बग़ैर अपने असर व रुसूख़ का इस्तेमाल करके ख़ुद जामा मस्जिद जा कर वहाँ से ताज़िये हटवाए थे। हवाले सुबूत और तफ़सील के लिए देखें।
📚 हयात ए मुफ़्ती ए आज़म, मुसन्नाफ़ा जनाब मिर्ज़ा अब्दुलवहीद बेग मरहूम, सफ़ा 22, मतबुआ इदारा तहक़ीक़ात मुफ़्ती ए आज़म बाज़ार सन्दल खां बरेली शरीफ़
ख़ुलासा ये कि ताज़ियादारी और उसकी खुराफातें राफ़ज़ीयों के इक़्तिदार नवाबी के दौर की देन है, रामपुर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, और बदायूं वग़ैरह में भी इमाम हुसैन رضی اللہ تعالٰی عنہ के नाम पर ये तमाशे मेले ठेले तभी से शुरू हुए हैं,
अपने सुन्नी भाइयों से गुज़ारिश करूँगा कि राफ़ज़ीयत की इन निशानियों को मिटायें और सच्चे अहले सुन्नत और मसलके आला हज़रत वाले बनकर रहें।
जारी है.......
📚 मुहर्रम मे क्या जाइज़? क्या नजाइज़?, सफ़ा 36, 37
✍🏻 मौलाना तत्हीर अहमद रज़वी बरेलवी
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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