क़ुर्बानी का बयान (पार्ट 27)
दूसरे के क़ुर्बानी के जानवर को बेला इजाज़त ज़बह कर दिया, मसाइल
4️⃣0️⃣ अगर बकरी क़ुर्बानी के लिए मुअय्यन (ख़ास) न हो तो बग़ैर इजाज़ते मालिक अगर दूसरा शख़्स क़ुर्बानी कर देगा तो क़ुर्बानी न होगी मसलन एक शख़्स ने पाँच (5) बकरियां ख़रीदी थीं और उसका ये ख़्याल था कि उनमें से एक बकरी को क़ुर्बानी करुँगा और उनमें से किसी एक को मुअय्यन नहीं किया था तो दूसरा शख़्स मालिक की जानिब से क़ुर्बानी नहीं कर सकता अगर करेगा तो तावान लाज़िम होगा ज़बह के बाद मालिक उसकी क़ुर्बानी की नियत करे बेकार है यानी इस सूरत में क़ुर्बानी नहीं हुई।
4️⃣1️⃣ दूसरे की बकरी ग़स्ब कर ली और उसकी क़ुर्बानी कर ली अगर मालिक ने ज़िन्दा बकरी का उस शख़्स से तावान ले लिया तो क़ुर्बानी हो गई मगर ये शख़्स गुनहगार है उस पर तौबा व अस्तग़फ़ार लाज़िम है और अगर मालिक ने तावान नहीं लिया बल्कि ज़बह की हुई बकरी ली और ज़बह करने से जो कुछ कमी हुई उसका तावान लिया तो क़ुर्बानी नहीं हुई।
4️⃣2️⃣ अपनी बकरी दूसरे की तरफ़ से ज़बह कर दी उसके हुक्म से ऐसा किया या बग़ैर हुक्म बहर सूरत उसकी क़ुर्बानी नहीं क्योंकि उसकी तरफ़ से क़ुर्बानी उस वक़्त हो सकती है जब उसकी मिल्क हो।
4️⃣3️⃣ एक शख़्स के पास किसी की बकरी अमानत के तौर पर थी अमीन ने क़ुर्बानी कर दी ये क़ुर्बानी सही नहीं न मालिक की तरफ़ से न अमीन की तरफ़ से अगरचे मालिक ने अमीन से अपनी बकरी का तावान लिया हो इसी तरह अगर किसी का जानवर उसके पास आरीयत या एजारह के तौर पर (यानी किराए के तौर पर) है और उसने क़ुर्बानी कर दिया ये क़ुर्बानी जायज़ नहीं। मर्हुन को (रहन रखी हुई चीज़ को) राहीन ने (रहन रखवाने वाले ने) क़ुर्बानी किया तो हो जाएगी कि जानवर उसकी मिल्क है और मुरतहीन ने किया तो उसमें इख़्तिलाफ़ है।
4️⃣4️⃣ मवेशी ख़ाना के जानवर एक मुद्दते मुक़र्ररह के बाद निलाम हो जाते हैं और बाअज़ लोग उसे ले लेते हैं उसकी क़ुर्बानी जायज नहीं क्योंकि ये जानवर उसकी मिल्क नहीं।
📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 348 - 349
जारी है......
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Dusre Ke Qurbani Ke Janwar Ko bela Ijazat Jabah Kar Diya, Masail
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