हैज़ व निफ़ास के मुतल्लिक़ अहकाम, मसाइल
(पार्ट 2)
➡️ ईदगाह के अंदर जाने में हर्ज नहीं।
➡️हांथ बढ़ा कर मस्जिद से कोई चीज़ लेना जायज़ है।
➡️ ख़ाना ए काबा के अंदर जाना और उस का तवाफ़ करना अगरचे मस्जिद ए ह़राम के बाहर से हो उनके लिए उनके लिए ह़राम है।
➡️ उस ह़ालत में रोज़ा रखना और नमाज़ पढ़ना ह़राम है।
➡️ उन दिनों में नमाज़ें माफ़ हैं उन की क़ज़ा भी नहीं, और रोज़ों की क़ज़ा और दिनों में रखना फ़र्ज़ है।
➡️नमाज़ का आख़िर वक़्त हो गया और अभी तक नमाज़ नहीं पढ़ी कि हैज़ आया, या बच्चा पैदा हुआ तो उस वक़्त की नमाज़ माफ़ हो गई अगरचे इतना तंग वक़्त हो गया कि उस नमाज़ की गुंजाईश ना हो।
➡️ नमाज़ पढ़ते में हैज़ आ गया, या बच्चा पैदा हुआ तो वो नमाज़ माफ़ है, अलबत्ता अगर नफ़्ल नमाज़ थी तो उस की क़ज़ा वाजिब है।
➡️ नमाज़ के वक़्त में वज़ु कर के उतनी देर तक ज़िक्र ए इलाही, दुरुद शरीफ़ और दीगर वज़ाइफ़ पढ़ लिया करे जितनी देर तक नमाज़ पढ़ा करती थी कि आदत रहे।
➡️ हैज़ वाली को 3 दिन से कम ख़ून आ कर बंद हो गया तो रोज़े रखे और वज़ु कर के नमाज़ पढ़े, नहाने की ज़रूरत नहीं, फ़िर उस के बाद अगर 15 दिन के अंदर ख़ून आया तो अब नहाए और आदत के दिन निकाल कर बाक़ी दिनों की क़ज़ा पढ़े और जिस की कोई आदत नहीं वो 10 दिन के बाद की नमाज़ें क़ज़ा करे, हाँ अगर आदत के दिनों के बाद या बे आदत वाली ने 10 दिन के बाद ग़ुस्ल कर लिया था तो उन दिनों की नमाज़ें हो गए क़ज़ा की हाजत नहीं और आदत के दिनों से पहले के रोज़ों की क़ज़ा करे और बाद के रोज़े हर हाल में हो गए।
📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 2, सफ़ा 380 - 381
जारी है........
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
Haiz Aur Nifas Ke Mutalliq Ahkam Wa Masail Part 2
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