हैज़ का बयान (पार्ट 1)
अल्लाह ﷻ इरशाद फ़रमाता है :-
अल क़ुरआन
*وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الْمَحِيضِ ۖ قُلْ هُوَ أَذًى فَاعْتَزِلُوا النِّسَاءَ فِي الْمَحِيضِ ۖ وَلَا تَقْرَبُوهُنَّ حَتَّىٰ يَطْهُرْنَ ۖ فَإِذَا تَطَهَّرْنَ فَأْتُوهُنَّ مِنْ حَيْثُ أَمَرَكُمُ اللَّهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ التَّوَّابِينَ وَيُحِبُّ الْمُتَطَهِّرِينَ*
ऐ महबूब! तुम से हैज़ के बारे में लोग सवाल करते हैं तुम फ़रमा दो वह गंदी चीज़ है तो हैज़ में औरतों से बचो और उन से क़ुरबत ना करो जब तक पाक ना हो लें तो जब पाक हो जाएं उन के पास उस जगह से आवो जिस का अल्लाह ने तुम्हें हुक्म दिया बेशक अल्लाह दोस्त रखता है तौबा करने वालों को और दोस्त रखता है पाक होने वालों को।
📚 तर्जमा कन्ज़ुल ईमान, पारा 2, रुकूअ 11, आयत 222.
📚बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 2, सफ़ा 369.
➡️ *हदीस शरीफ़ :-* सहीह् मुस्लिम में अन्स बिन मालिक رضی اللہ تعالٰی عنہ से मरवी, फ़रमाते हैं कि यहुदीयों में जब किसी औरत को हैज़ आता तो उसे ना अपने साथ खिलाते ना अपने साथ घरों में रखते। सहाबा ए किराम رضی اللہ تعالیٰ عنہما ने नबी ए करीम “ﷺ” से सवाल किया उस पर अल्लाह तआला ने आयत وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الْمَحِيضِ ۖ नाज़िल फ़रमाइ तो रसूलल्लाह “ﷺ” ने इरशाद फ़रमाया :- *जिम्आ के सिवा हर शय (चीज़) करो।*
📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 2, सफ़ा 369
➡️ *हदीस शरीफ़ :-* सहीह् बुख़ारी में है, उम्मुल मोमिनीन हज़रत ए आईशा सिद्दिक़ा رضی اللہ تعالٰی عنہا फ़रमाती हैंं हम हज के लिए निकले जब सर्फ़(मक्का के क़रीब एक मक़ाम है) में पहुंचे मुझे हैज़ आया तो मैं रो रही थी कि रसूलल्लाह “ﷺ” मेरे पास तशरीफ़ लाए फ़रमाया :- *तुझे क्या हुआ? क्या तुम हाइज़ हुई? अर्ज़ की, हाँ। फ़रमाया ये एक ऐसी चीज़ है जिस को अल्लाह तआला ने बनाते आदम पर लिख दिया है तो सिवा ख़ाना ए काबा के तवाफ़ के सब कुछ अदा कर जिसे हज करने वाला अदा करता है।* और फ़रमाती हैंं हुज़ूर “ﷺ” ने अपनी अज़वाजे मोतेहरात की तरफ़ से एक गाय क़ुरबानी की।
📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 2, सफ़ा 370
➡️ *हदीस शरीफ़ :-* सहीह् मुस्लिम में उम्मुल मोमिनीन हज़रत ए आईशा सिद्दिक़ा رضی اللہ تعالٰی عنہا से है, फ़रमाती हैंं कि ज़माना हैज़ में, मैं पानी पीती फ़िर हुज़ूर “ﷺ” को दे देती तो जिस जगह मेरा मुँह लगा था हुज़ूर “ﷺ” वहीं दहन मुबारक रख कर पीते और हालते हैज़ में, मैं हड्डी से गोश्त नोच कर खाती फ़िर हुज़ूर “ﷺ” को दे देती तो हुज़ूर “ﷺ” अपना दहन शरीफ़ उस जगह रखते जहां मेरा मुँह लगा था।
📚बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 2, सफ़ा 370
➡️ हैज़ की हिकमत:-
औरत बालिग़ा के बदन में फ़ितरतन ज़रूरत से कुछ ज़्यादा ख़ून पैदा होता है कि हमल की हालत में वह ख़ून बच्चे की ग़िज़ा में काम आए और बच्चे के दुध पीने के ज़माने में वही ख़ून दूध हो जाए और ऎसा ना हो तो हमल और दुध पिलाने के ज़माने में उस की जान पर बन जाए, यही वजह है कि हमल और इबतदाए शिर ख़्वारगी में ख़ून नहीं आता और जिस ज़माने में ना हमल हो ना दुध पिलाना वह ख़ून अगर बदन से ना निकले तो क़िस्म - क़िस्म की बीमारियाँ हो जाएं।
📚बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 2, सफ़ा 371
🔴और ज़्यादा तफ़सील से जानने के लिए बाहर ए शरीअत का मुताअला करें।
✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
Follow this link to join my WhatsApp group: https://chat.whatsapp.com/KHzCWJHrZif31vvWni09z5
Haiz Ka Bayan Part 1,
Haiz Ki Hikmat
Haiz Nifas Wa Istihaza Ka Bayan Bahar E Shariat
ILM KI RAUSHNI
0 Comments