Haiz Wa Nifas Ke Mutalliq Ahkam Aur Masail Part 1

 हैज़ व निफ़ास के मुतल्लिक़ अहकाम

यानि हैज़ व निफ़ास में जब औरतें रहती हैं तो वह कौन कौन से काम कर सकती हैं और कौन कौन से नहीं।

(पार्ट 1)

मसाइल 

➡️ हैज़ व निफ़ास वाली औरत को क़ुरआन मजीद पढ़ना देख कर, या ज़बानी और उस का छुना अगरचे उस का जिल्द या चौली या हाशिया को हांथ या उन्गली की नोक या बदन का कोई हिस्सा लगे ये सब ह़राम है।

➡️ काग़ज़ के पर्चे पर कोई सुरह या आयत लिखी हो उस का भी छुना ह़राम है। 

➡️ जुज़दान में क़ुरआन मजीद हो तो उस जुज़दान के छुने में हर्ज नहीं। 

➡️ उस ह़ालत में कुर्ते के दामन या दोपट्टे के आंचल से या किसी ऐसे कपड़े से जिस को पहने, ओढ़े हुए है क़ुरआन मजीद छुना ह़राम है ग़र्ज़ उस ह़ालत में क़ुरआन मजीद व कुतुबे दीनीया पढ़ने और छुने के मुतल्लिक़ वही सब एहकाम हैं जो उस शख़्स के बारे में हैं जिस पर नहाना फ़र्ज़ है जिन का बयान ग़ुस्ल के बाब में गुज़रा। 

➡️मुअल्लिमा (पढ़ाने वाली) को हैज़ व निफ़ास हो तो एक एक कलमा सांस तोड़ तोड़ कर पढ़ाए और हिज्जे कराने में कोई ह़र्ज नहीं।

➡️ दुआ ए क़ुनूत पढ़ना इस हालत में मकरुह है।

اَللَّهُمَّ اِنَّا نَسْتَعِينُكَ से بِالكُفَّارِ مُلْحَقٌ

 तक दुआ ए क़ुनूत है। 

नोट :- ये इमाम मुहम्मद رحمتہ اللہ تعالیٰ علیہ का मज़हब है मगर ज़ाहिर उल रवाया में है कि इस ह़ालत में दुआए क़ुनुत पढ़ना मकरुह नहीं है। *"التجنیس"*

لصاحب الھداية، जिल्द 1 सफ़ा 186 पर है कि इसी पर फ़तवा है। ये भी मुमकिन है कि कातिब से मकरुह के बाद "नहीं" लिखना रह गया हो और सदरुश्शरीआ बदरुलतरीक़ह् मुफ़्ती मुहम्मद अमजद अली आज़मी علیہ رحمۃ اللہ تعالٰی علیہ की अस्ल इबारत यूं हो :- दुआए क़ुनुत पढ़ना इस हालत में मकरुह नहीं है। 

➡️ क़ुरआन ए मजीद के अलावा और तमाम अज़कार कलमा शरीफ़, दुरूद शरीफ़ वग़ैरह पढ़ना बेला कराहत जायज़ बल्कि मुस्तहब है और इन चीज़ों को वज़ू या कुल्ली करके पढ़ना बेहतर और वैसे ही पढ़ लिया जब भी हर्ज़ नहीं और उन के छुने में भी हर्ज़ नहीं। 

➡️ ऐसी औरत को अज़ान का जवाब देना जायज़ है। 

➡️ ऐसी औरत को मस्जिद में जाना ह़राम है। 

➡️ अगर चोर या दरिन्दे से डर कर मस्जिद में चली गई तो जायज़ है मगर उसे चाहिए कि तयमुम कर ले। यूंही मस्जिद में पानी रखा है या कुआं है और कहीं और पानी नहीं मिलता तो तयमुम करके जाना जायज़ है। 

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 2, सफ़ा 379

जारी है.....

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

Haiz Wa Nifas Ke Mutalliq Ahkam Aur Masail 

Yani Haiz Wa Nifas Mein Jab Koi Aurat Rahti Hai To Koun Koun Se Kaam Kar Sakti Hai Koun Koun Se Nahi.


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