Imam Bade Part 20

 मुहर्रम मे क्या जाइज़? क्या नजाइज़?

 (पार्ट 20) 

📋 इमाम बाड़े

जहाँ ताज़िये को रखते हैं इस इमारत को इमाम बाड़ा कहते हैं, ये इमाम बाड़े बनाना और उनकी ताज़ीम करना ये सब राफ़ज़ी फ़िरके की देन है, इमाम बाड़े की कोई शरई हैसियत नहीं, उनकी ज़मीनें किसी बाल बच्चेदार बेघर ग़रीब मुसलमान को दे दी जाएं और उसका सवाब हज़रत ए इमाम ए आली मक़ाम رضی اللہ تعالٰی عنہ की रूह पाक को ईसाल कर दिया जाए तो ये एक इस्लामी काम होगा, या वहां ज़रुरत हो तो मस्जिद बना दी जाए या मुसलमानों के लिए क़ब्रिस्तान या मुसाफ़िर खाना वग़ैरह जिससे क़ौम को नफ़अ (फ़ायदा) पहुंचे तो निहायत उम्दा बात है। 


आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां फ़ाज़िले बरेलवी علیہ الرحمتہ و الرضوان फ़रमाते हैं:- 


*इमाम बाड़ा वक़्फ नहीं हो सकता वो जिसने बनाया वो उसी की मिल्क है जो चाहे करें वो न रहा तो उसके वारिसों की मिल्क है उन्हें इख़्तियार है।*


📚 फ़तावा रज़विया, जिल्द 16, सफ़ा 121


जारी है....... 

📚 मुहर्रम मे क्या जाइज़? क्या नजाइज़?, सफ़ा 41

✍🏻 मौलाना तत्हीर अहमद रज़वी बरेलवी

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Imam Bare 

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