Imam E Qasim Ki Mehandi Part 22

 मुहर्रम मे क्या जाइज़? क्या नजाइज़?

 (पार्ट 22) 

📋 इमाम ए क़ासिम की मेहन्दी

हज़रत ए इमाम ए क़ासिम رضی اللہ تعالٰی عنہ इमाम ए हुसैन رضی اللہ تعالٰی عنہ के भतीजे और हज़रत ए इमाम ए हसन رضی اللہ تعالٰی عنہ के फ़रज़न्दे अरजमन्द हैं।

करबला में अपने चचा बुज़ुर्गवार के साथ बहुत से ज़ालिमों को मार कर फ़िन्नार किया फ़िर ख़ुद शहीद किए गए। बात सिर्फ़ इतनी है कि हज़रत ए इमाम ए हुसैन رضی اللہ تعالٰی عنہ की एक साहबज़ादी से उनकी निस्बत तय हो चुकी थी निक़ाह से पहले ही करबला का सांनेहा दर पेश हो गया। इतनी सी बात को लोगों ने अफ़साना बना दिया और कहा कि करबला में ही उनकी शादी हुई और वो दुल्हा बने उनके मेहन्दी लगी और मेहन्दी कहीं 7 तारीख़ और कहीं 8 तारीख़ और कहीं 13 के मेले तमाशे और ढ़ोल ढ़माके बन गई। बांस की खपुच्चीयों और पन्नी व कागज़ से छोटे छोटे खिलौने बनाए जाते हैं और उनका नाम जाहिलों ने मेहन्दी रख दिया और मुसलमानों में से वो लोग जिन का मिजाज़ तमाशाई था उन्होंने अपने ज़ौक़ की चाशनी खेल खेलने और तमाशे व मेले करने के लिए हज़रत ए इमाम ए क़ासिम رضی اللہ تعالٰی عنہ की मुबारक शख़्सियत को आड़ बना लिया। 


भाइयों! ये तमाशे कब तक करोगे कुछ मरने के बाद की और आख़िरत की भी फ़िक़्र है। तक़रीरों के ज़रिए लम्बे लम्बे नज़राने ऐंठने वाले अफ़साना निगार ख़तीबों को भी रंग भरने का ख़ूब मौक़ा मिला और नई दुल्हन के सामने दुल्हा की शहादत रोने और रुलाने और दहाडे मारने का बहाना बन गई, और शाइरों की मरसिया निगारी ने इस झूठी बात को कहाँ से कहाँ तक पहुंचा दिया।


ख़ुलासा ये है कि मेहन्दी की रस्म और उससे मुतअल्लिक़ वाक़िया सब मन गढ़न्त और फ़ुजूलियात से है और उसके नाम पर जो कुछ ख़ुराफातें और जाहिलाना हरक़तें होती हैं ये सब नाजाइज़ व गुनाह व हराम हैं।


आला हज़रत इमाम ए अहले सुन्नत मौलाना अहमद रज़ा खां फ़ाज़िले बरेलवी علیہ الرحمتہ و الرضوان फ़रमाते हैं:- 


*ताज़िया, मेहन्दी, शब ए आशूरा को रौशनी करना बिदअत व नाजाइज़ है। हज़रत ए सय्यदना इमाम ए क़ासिम رضی اللہ تعالٰی عنہ के साथ करबला में हज़रत ए सय्यदना इमाम ए हुसैन رضی اللہ تعالٰی عنہ की साहबज़ादी की शादी का वाकिया साबित नहीं है किसी ने गढ़ा है।*


📚 फ़तावा रज़विया, जिल्द 24, सफ़ा 500 - 501


जारी है......... 

📚 मुहर्रम मे क्या जाइज़? क्या नजाइज़?, सफ़ा 42, 43

✍🏻 मौलाना तत्हीर अहमद रज़वी बरेलवी

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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