इस्तेहाज़ा के अहकाम व मसाइल
(पार्ट 2)
1️⃣ इस्तेहाज़ा में ना नमाज़ माफ़ है ना रोज़ा, ना ऎसी औरत से सोहबत हराम।
2️⃣ इस्तेहाज़ा अगर इस हद तक पहुंच गया कि उस को इतनी मोहलत नहीं मिलती की वज़ू कर के फ़र्ज़ नमाज़ अदा कर सके तो नमाज़ का पुरा एक वक़्त शुरू से आख़िर तक उसी हालत में गुज़र जाने पर उसको माअज़ुर कहा जाएगा, एक वज़ू से उस वक़्त में जितनी नमाज़ें चाहे पढ़े, ख़ून आने से उसका वज़ू ना जाएगा।
3️⃣ अगर कपड़ा वग़ैरह रख कर इतनी देर तक ख़ून रोक सकती है कि वज़ू कर के फ़र्ज़ पढ़ ले तो उज़्र साबित ना होगा।
4️⃣ हर वो शख़्स जिस को कोई ऎसी बीमारी है कि एक वक़्त पूरा ऎसा गुज़र गया कि वज़ू के साथ नमाज़ ए फ़र्ज़ अदा ना कर सका वो माअज़ुर है, उस का भी यही हुक्म है कि वक़्त में वज़ू कर ले और आख़िर वक़्त तक जितनी नमाज़ें चाहे उस वज़ू से पढ़े, उस बीमारी से उस का वज़ू नहीं जाता, जैसे क़तरे का मर्ज़, यादास्त आना, या हवा ख़ारिज होना, या दुखती आंख से पानी गिरना, या फोड़े, या नासूर से हर वक़्त रतुबत बहना, या कान, नाफ़, पिस्तान से पानी निकलना कि ये सब बीमारियाँ वज़ू तोड़ने वाली हैं, इन में जब पूरा एक वक़्त ऎसा गुज़र गया कि हर चन्द कोशिश की मगर तहारत के साथ नमाज़ ना पढ़ सका तो उज़्र साबित हो गया।
📚📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 2, सफ़ा 385
जारी है.........
✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
Istihaza Ke Ahkam Wa Masail Part 2
Istihaja Ka Bayan Bahar E Shariat
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