Istihaza Ke Ahkam Wa Masail Part 3

 इस्तेहाज़ा के अहकाम व मसाइल 

(पार्ट 3)

5️⃣ जब उज़्र साबित हो गया तो जब तक हर वक़्त में एक एक बार भी वो चीज़ पायी जाए माअज़ूर ही रहेगा, मसलन औरत को एक वक़्त तो इस्तेहाज़ा ने तहारत की मोहलत नहीं दी अब इतना मौक़ा मिलता है कि वज़ू कर के नमाज़ पढ़ ले मगर अब भी एक आध दफ़अ हर वक़्त में ख़ून आ जाता है तो अब भी माअज़ूर है। यूँही तमाम बीमारियों में और जब पूरा वक़्त गुज़र गया और ख़ून नहीं आया तो अब माअज़ूर ना रही जब फ़िर कभी पहली हालत पैदा हो जाए तो फ़िर माअज़ूर है उस के बाद फ़िर पूरा वक़्त ख़ाली गया तो उज़्र जाता रहा।

6️⃣ नमाज़ का कुछ वक़्त ऎसी हालत में गुज़रा कि उज़्र ना था और नमाज़ ना पढ़ी और अब पढ़ने का इरादा किया तो इस्तेहाज़ा या बीमारी से वज़ू जाता रहता है ग़र्ज़ ये बाक़ी वक़्त यूंहीं गुज़र गया और उसी हालत में नमाज़ पढ़ ली तो अब उस के बाद का वक़्त भी पूरा अगर उसी इस्तेहाज़ा या बीमारी में गुज़र गया तो वो पहली भी हो गई और अगर उस वक़्त इतना मौक़ा मिला कि वज़ू कर के फ़र्ज़ पढ़ ले तो पहली नमाज़ का आइदा (दुहराए) करे ।

7️⃣ ख़ून बहते में वज़ू किया और वज़ू के बाद ख़ून बंद हो गया और उसी वज़ू से नमाज़ पढ़ी और उस के बाद जो दूसरा वक़्त आया वो भी पूरा गुज़र गया कि ख़ून ना आया तो पहली नमाज़ का आइदा (दुहराए) करे । यूंहीं अगर नमाज़ में बंद हुआ और उसके बाद दूसरे में बिल्कुल ना आया जब भी आइदा करे।

8️⃣ फ़र्ज़ नमाज़ का वक़्त जाने से माअज़ूर का वज़ू टूट जाता है जैसे किसी ने असर के वक़्त वज़ू किया था तो आफ़ताब के डूबते ही वज़ू जाता रहा और अगर किसी ने आफ़ताब निकलने के बाद वज़ू किया तो जब तक ज़ोहर का वक़्त ख़त्म ना हो वज़ू ना जाएगा कि अभी तक किसी फ़र्ज़ नमाज़ का वक़्त नहीं गया।

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 2, सफ़ा 385 - 386

जारी है........

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

Istihaza Ke Ahkam Wa Masail Part 3

Istihaja Ka Bayan 

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