इस्तेहाज़ा के अहकाम व मसाइल
(पार्ट 4)
9️⃣ वज़ू करते वक़्त वो चीज़ नहीं पायी गई जिस के सबब माअज़ूर है और वज़ू के बाद भी ना पायी गई यहां तक कि बाक़ी पूरा वक़्त नमाज़ का ख़ाली गया तो वक़्त के जाने से वज़ू नहीं टूटता, यूंहीं अगर वज़ू से पेशतर पायी गई मगर ना वज़ू के बाद बाक़ी वक़्त में पायी गई ना उस के बाद दूसरे वक़्त में तो वक़्त जाने से वज़ू ना टुटेगा।
🔟 और अगर उस वक़्त में वज़ू से पेशतर वो चीज़े पायी गई और वज़ू के बाद भी वक़्त में पायी गई या वज़ू के अंदर पायी गई और वज़ू के बाद उस वक़्त में ना पायी गई मगर बाद वाले में पायी गई, तो वक़्त ख़त्म होने पर वज़ू जाता रहेगा अगरचे वो हदस ना पाया जाए।
1️⃣1️⃣ माअज़ूर का वज़ू उस चीज़ से नहीं जाता जिस के सबब माअज़ूर है, हां अगर कोई दूसरी चीज़ वज़ू तोड़ने वाली पायी गई तो वज़ू जाता रहा। मसलन जिस को क़तरे का मर्ज़ है, हवा निकलने से उस का वज़ू जाता रहेगा और जिस को हवा निकलने का मर्ज़ है, क़तरे से वज़ू जाता रहेगा।
1️⃣2️⃣ माअज़ूर ने किसी हदस के बाद वज़ू किया और वज़ू करते वक़्त वो चीज़ नहीं है जिस के सबब माअज़ूर है, फ़िर वज़ू के बाद वो उज़्र वाली चीज़ पायी गई तो वज़ू जाता रहा, जैसे इस्तेहाज़ा वाली ने पाख़ाना पेशाब के बाद वज़ू किया और वज़ू करते वक़्त ख़ून बंद था बाद वज़ू के आया तो वज़ू टूट गया और अगर वज़ू करते वक़्त वो उज़्र वाली चीज़ पायी जाती थी तो अब वज़ू की ज़रूरत नहीं।
1️⃣3️⃣ माअज़ूर के एक नथने से ख़ून आ रहा था वज़ू के बाद दूसरे नथने से आया वज़ू जाता रहा, या एक ज़ख्म बह रहा था अब दूसरा बहा, यहां तक कि चेचक के एक दाना से पानी आ रहा था अब दूसरे दाना से आया वज़ू टूट गया।
📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 2, सफ़ा 386 - 387
जारी है......
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Istihaza Ke Ahkam Wa Masail Part 4
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