मुहर्रम मे क्या जाइज़? क्या नजाइज़?
(पार्ट 19)
📋 मसनोई और फ़र्ज़ी करबलायें
करबला इराक़ में उस जगह का नाम है जहां हज़रत ए इमाम ए आली मक़ाम رضی اللہ تعالٰی عنہ अपने साथियों के साथ यज़ीदी फ़ौजों के हाथों शहीद किए गए। अब जहाँ ताज़िये जमा और फ़िर दफ़न किये जाते हैं उन जगहों को लोग करबला कहने लगे, मजहबे इस्लाम में इन फ़र्ज़ी करबलाओं की कोई हैसियत नहीं उन्हें मुक़द्दस मक़ाम ख़्याल करके उनका एहतिराम करना सब राफ़ज़ीयत और जिहालत की पैदावार है।
आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां علیہ الرحمتہ و الرضوان फ़रमाते हैं:-
*अलम, ताज़िये, मेहंदी, उनकी मन्नत गश्त चढ़ावा, ढ़ोल ताशे, मुजीरे, मरसिये, मातम, मसनोई करबला जाना ये सब बातें हराम व नाजाइज़ व गुनाह हैं।*
📚 फ़तावा रज़विया, जिल्द 24, सफ़ा 496
कुछ जगहों पर औरतें रात को चिराग़ लेकर करबला जाती हैं, और ख़्याल करती हैं कि जिसका चिराग़ जलता हुआ पहुँच गया उसकी मुराद पूरी हो गई, ये सब जाहिलाना बातें हैं ऐसी वहम परस्ती की इस्लाम में कोई गुंजाइश नहीं है।
जारी है........
📚 मुहर्रम मे क्या जाइज़? क्या नजाइज़?, सफ़ा 40
✍🏻 मौलाना तत्हीर अहमद रज़वी बरेलवी
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
Follow this link to join my WhatsApp group: https://chat.whatsapp.com/BJNhO3LXmNjGjGO6P0Lgs1
Join Our Telegram group
ILM KI RAUSHNI
https://t.me/ILMKIRAUSHNI
Masnooi Aur Farzi Karbalayen Part 19
0 Comments