Qurbani Ka Fayda

क़ुर्बानी का बयान (पार्ट 32)

फ़ायदा


अहादीस से साबित है कि हुज़ूर “ﷺ” इस उम्मत ए मरहुमा की तरफ़ से क़ुर्बानी की ये हुज़ूर “ﷺ” के बेशुमार अल्ताफ़ में से एक ख़ास करम है कि इस मौका पर भी उम्मत का ख़्याल फ़रमाया और जो लोग क़ुर्बानी ना कर सके उनकी तरफ़ से ख़ुद ही क़ुर्बानी अदा फ़रमाई। ये शुब्हा कि एक मेंढा उन सब की तरफ़ से क्यों कर जो सकता है या जो लोग अभी पैदा ही ना हुए उनकी क़ुर्बानी क्यों कर हुई इसका जवाब ये है कि ये हुज़ूर “ﷺ” के ख़साइस से है। जिस तरह हुज़ूर “ﷺ” ने छः (6) महीने के बकरी के बच्चा की क़ुर्बानी अबुबरदह رضی اللہ تعالٰی عنہ के लिए जायज़ फ़रमा दी औरों के लिए उसकी मुमानिअत कर दी। उसी तरह इसमें ख़ुद हुज़ूर “ﷺ” की ख़ुसुसीयत है। कहना ये है कि जब हुज़ूर “ﷺ” ने उम्मत की तरफ़ से क़ुर्बानी की तो जो मुस्लमान साहिब ए इसतेताअत हो अगर हुज़ूर “ﷺ” के नाम की एक क़ुर्बानी करे तो ज़हे नसीब और बेहतर सिंग वाला मेंढा है जिसकी स्याही में सफ़ेदी की भी आमेज़श हो जैसे मेंढे की ख़ुद हुज़ूर “ﷺ” ने क़ुर्बानी फ़रमाई।

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 353

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

क़ुर्बानी का बयान मुकम्मल हुए।


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