Qurbani Ke Mutfariq Masail

क़ुर्बानी का बयान (पार्ट 29)

मुतफ़रिक़ मसाइल 


5️⃣0️⃣ दूसरे से क़ुर्बानी ज़बह कराई ज़बह के बाद वो ये कहता है मैंने क़सदन بِسْمِ اللّٰه नहीं पढ़ी उसको उस जानवर की क़ीमत देनी होगी फ़िर अगर क़ुर्बानी का वक़्त बाक़ी है तो उस क़ीमत से दूसरा जानवर ख़रीद कर क़ुर्बानी करे और उसका गोश्त सदक़ा करे ख़ुद न खाए और वक़्त बाक़ी न हो तो उस क़ीमत को सदक़ा कर दे।

5️⃣1️⃣ तीन (3) शख़्सों ने तीन (3) बकरियां क़ुर्बानी के लिए ख़रीदें फ़िर ये बकरियां मिल गईं पता नहीं चलता कि किसकी कौन-सी बकरी है उस सूरत में ये करना चाहिए कि हर एक-दूसरे को ज़बह करने का वकील कर दे सबकी कुर्बनियां हो जाएंगी कि उसने अपनी बकरी ज़बह की जब भी जायज़ है और दूसरे की ज़बह की जब भी जायज़ है कि ये उसका वकील है।

5️⃣2️⃣ दूसरे से ज़बह कराया और ख़ुद अपना हाथ भी छूरी पर रख दिया कि दोनों ने मिलकर ज़बह किया तो दोनों पर بِسْمِ اللّٰه कहना वाजिब है एक ने भी क़सदन छोड़ दी या ये ख़्याल करके छोड़ दी कि दूसरे ने कह ली मुझे कहने की क्या ज़रुरत दोनों सूरतों में जानवर हलाल न हुआ।

5️⃣3️⃣ क़ुर्बानी के लिए गाय ख़रीदी फ़िर उसमें छः(6) शख़्सों को शरीक कर लिया सबकी क़ुर्बनियां हो जाएंगी मगर ऐसा करना मकरूह है हाँ अगर ख़रीदने ही के वक़्त उसका ये इरादा था कि उसमें दूसरों को शरीक करूँगा तो मकरूह नहीं और अगर ख़रीदने से पहले ही शिरकत कर ली जाए तो ये सबसे बेहतर और अगर ग़ैरे मालिक निसाब ने क़ुर्बानी के लिए गाय ख़रीदी तो ख़रीदने से ही उस पर उस गाय की क़ुर्बानी वाजिब हो गई अब वह दूसरे को शरीक नहीं कर सकता।

📚बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 350 - 351 

जारी है......... 

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी 

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