Taziyadari Ladai Jhagde Ki Buniyad Part 11

 मुहर्रम मे क्या जाइज़? क्या नजाइज़?

 (पार्ट 11) 

 ताज़ियेदारी लड़ाई झगड़े की बुनियाद.......1

लड़ाई झगड़े करना तो अक्सर जगह ताज़ियेदारों की आदत बन गई है,रास्तों के लिए खड़ी फ़सलों को रोन्दना,अपनी वाह वाही और शान शैली के लिए एक दूसरे से मुक़ाबिले करना,ख़ुब ऊँचे ऊँचे ताज़िये बनाकर उन्हें निकालने के लिए बिजली के तार या खड़े दरख़्तों को काटना तरह तरह से ख़ुदा की मख़लूक़ को सताना उनका मिज़ाज हो गया है। इन सब बातों में कभी कभी ग़ैर मुस्लिमों से भी टकराव की नौबत आ जाती है,और ये सब बे मक़सद झगड़े होते हैं। मुसलमानों की तारीख़ में कभी भी इन ग़ैर ज़रूरी फ़ालतू बातों के लिए लड़ाइयाँ नहीं लड़ी गयीं और मुसलमान फ़ितरतन झगड़ालू नहीं होता। 


 ताज़ियेदारों को तो मैंने देखा कि ये लोग ताज़िये उठा कर मातम करते हुए ढ़ोल बाजों के साथ चलते हैं तो होश खो बैठते हैं बे काबू और आपे से बाहर हो जाते हैं जोश ही जोश दिखाई देता है। ख़ुदा न करे मैं हर मुसलमान मर्द व औरत की जान माल,इज्ज़त व आबरू की सलामती की अल्लाह तआला से दुआ करता हूँ लेकिन इस बढ़ती हुई ताज़ियेदारी और ताज़िये उठाते वक़्त ताज़ियेदारों के बे काबू जोशीले रंग से मुझ को तो हिन्दुस्तान में ख़तरा महसूस हो रहा है,कभी उसकी वजह से मुसलमानों का बड़ा नुक़्सान हो सकता है,और ये बे नतीजा नुक़्सान होगा,और ये अन्जाम से बे ख़बर लोग कभी भी क़ौम को दंगों और बलवों की आग में झोंक सकते हैं। कुछ जगह ऐसा हुआ भी है और कही  होते होते बच गया है।


अभी चन्द साल पहले अख़बार में आया था कि ताज़ियेदारों ने एक हिन्दू का आठ बीघा खेत रोन्द डाला बड़ी मुश्किल से पुलिस ने दंगे पर कन्ट्रोल किया, दर असल ये सब मुसलमानों को तबाह व बरबाद कराने वाले काम हैं।


आम रास्तों को बन्द करने, सड़कों पर जाम लगाने में भी ताज़ियेदारों को बहुत मज़ा आता है और वह ऐसा कर के बहुत ख़ुश होते हैं और उसको बड़ा कमाल समझते हैं, हांलाकि इस्लामी नुक़्ता-ए-नज़र से ये रिफ़ाहे आम में मुदाख़लत है,अवाम की हक़ तल्फ़ी नाजाइज़ व गुनाह है। 


  हदीस ए पाक में है हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया :-


    जो जिहाद के लिए जाने वाला किसी गुज़रने वाले के लिए रास्ता तंग करे उसको जिहाद का सवाब नहीं। 


📚मिश्कात बाब आदादुस्सफ़र सफ़ा 340


उलमा-ए-किराम ने भी इस हरकत के नाजाइज़ होने का फ़तवा दिया है। इस की तहकीक़ हमारी किताब 

(📚 बारहवीं शरीफ़ जलसे और जुलूस) में देखे मज़हब और धरम के नाम पर आज कल ऐसा बहुत किया जा रहा है।


जारी है............ 

 

📚 मुहर्रम मे क्या जाइज़? क्या नजाइज़?, सफ़ा 23 —25


✍🏻 मौलाना तत्हीर अहमद रज़वी बरेलवी


✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी


Follow this link to join my WhatsApp group: https://chat.whatsapp.com/BJNhO3LXmNjGjGO6P0Lgs1



*Join Our Telegram group*


ILM KI RAUSHNI

https://t.me/ILMKIRAUSHNI


Taziyadari Ladai Jhagde Ki Buniyad Part 11

Post a Comment

0 Comments