चालीस अहादीसे शफ़ाअत (पार्ट 3)
अलअहादीस
शफ़ाअते कुबरा की हदीसें जिनमें साफ़ सरीह इरशाद हुआ कि महशर का दिन बहुत तवील (लम्बा) दिन होगा कि काटे न कटेगा और सरों पर आफ़ताब और दोज़ख़ नज़दीक उस दिन सूरज में दस बरस कामिल की गर्मी जमा करेंगे और सरों से कुछ ही फ़ासले पर लाकर रखेंगे प्यास की वह शिद्दत कि ख़ुदा न दिखाए गर्मी वह क़यामत की कि अल्लाह बचाए बांसों पसीना ज़मीन में जज़्ब होकर ऊपर चढ़ेगा यहां तक कि गले गले से भी ऊँचा होगा जहाज़ छोड़ें तो बहने लगें लोग उसमें गोते खायेंगे लोग इन अज़ीम आफ़तों में जान से तंग आकर शफ़ीअ (शफ़ाअत या सिफ़ारिश करने वाला) की तलाश में जा-ब-जा फिरेंगे आदम (यानी आदम عَلَيْهِ ٱلسَّلَامُ ) व नूह व ख़लील (यानी हज़रते इब्राहिम عَلَيْهِ ٱلسَّلَامُ ) व कलीम (यानी मूसा عَلَيْهِ ٱلسَّلَامُ ) व मसीह (यानी हज़रते ईसा عَلَيْهِ ٱلسَّلَامُ ) के पास हाज़िर होकर जवाब साफ़ सुनेंगे।
सब अम्बिया (नबी की जमा) फ़रमायेंगे हमारा यह मर्तबा नहीं हम इस लाएक़ नहीं हमसे यह काम न निकलेगा नफ़्सी नफ़्सी तुम और किसी के पास जाओ यहां तक की सब के बाद हुज़ूर पुर नूर ख़ातनुन्नबिइयीन (जिन पर नुबुव्वत ख़त्म हुई) सय्येदुल अव्वलीन व आख़रीन (शुरु वाले और आख़िर वाले सब ही के सरदार) शफ़ीउल मुज़निबीन रहमतुल्लिल आलमीन (तमाम आलम के लिए रहमत) “ﷺ” की ख़िदमत में हाज़िर होंगे हुज़ूरे अक़दस ﷺ“ اَناَ لَھاَ اَناَ لَھاَ” फरमायेंगे यानी मैं हुँ शफ़ाअत के लिए, मैं हुँ शफ़ाअत के लिए फिर अपने रब्बे करीम ﷻ की बारगाह में हाज़िर होकर सजदा करेंगे उनका रब तबारक व तआ़ला इरशाद फरमाएगा :-
یَا مُحَمَّدُ! اِرْفَعْ رَأْسَکَ وَقُلْ تُسْمَعْ و َسَلْ تُعْطَہْ وَاشْفَعْ تُشَفَّع
"ऐ मुहम्मद अपना सर उठाओ और अर्ज़ करो तुम्हारी सुनी जाएगी और मांगो कि तुम्हें अता होगा और शफ़ाअत करो कि तुम्हारी शफ़ाअत क़बूल होगा।
यही मक़ामे महमूद होगा जहाँ तमाम अव्वलीन व आख़रीन में हुज़ूर की तारीफ़ व ह़म्द व सना का गुल पड़ेगा और मुवाफ़िक़ व मुख़ालिफ़ सब पर खुल जाएगा बारगाहे इलाही में जो वजाहत (इज्ज़त, दबदबा) हमारे आक़ा की है किसी की नहीं और मालिके अ़ज़ीम ﷻ के यहाँ जो अज़मत हमारे मौला के लिए है किसी के लिए नहीं وَلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
इसी के लिए अल्लाह तआ़ला अपनी हिकमते कामिल के मुताबिक़ लोगों के दिलों में डालेगा कि पहले और अम्बियाए किराम عَلَئھِمُ الصَّلٰوةُوَالتَّسْلِیْم के पास जाएं और वहाँ से महरूम फिर कर उनकी ख़िदमत में हाज़िर आयें ताकि सब जान लें कि मनसबे शफ़ाअत इसी सरकार का ख़ास्सा है यानी हुज़ूर ﷺ के लिए ख़ास है दूसरे की मजाल नहीं कि उसका दरवाज़ा खोले وَلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
जारी है.....
📚 चालीस (40) अहादीसे शफ़ाअत, सफ़ा 9-10
✍️आला हज़रत इमामे अहले सुन्नत मौलाना शाह अहमद रज़ा खां علیہ الرحمتہ و الرضوان
✒️✒️मिन जानिब:- इल्म की रौशनी
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Aala Hazrat Imam E Ahle Sunnat Maulana Ash Shah Imam Ahmad Raza Khan علیہ الرحمتہ و الرضوان

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