Chalis (40) Ahadees E Shafaat Part 8

 

चालीस अहादीसे शफ़ाअत (पार्ट 8)

हदीस न.16 - 21 :-  बुख़ारी व मुस्लिम व निसाई हज़रते जाबिर इब्ने अब्दुल्लाह और अहमद बसनदे और बुख़ारी तारीख़ में हसन व बज़्जार बसनद जय्यद व दारमी व इब्ने शैबा व अबु याला व नु‌ऐम व बैहक़ी हजरते अबु ज़र और तबरानी मोजमे औसत में बसनदे हज़रते अबु सईद ख़ुदरी और कबीर में हज़रते साएब इब्ने यज़ीद और अहमद‌ बइस्नादे हसन और इब्ने शैबा व तबरनी हज़रते अबु मुसा अशअरी رضی اللہ تعالٰی عنہم से रावी हुज़ूर शफ़ीउल मुज़निबीन “ﷺ” फ़रमाते हैं :- 

قَّالَ : قَّالَ رَسُوْلُ اللّٰهِ صَلَّى اللَّهُ تَعَالٰى عَلَيْهِ وَسَلَّمَ : ( وَأُعْطِيْتُ مَا لَمْ يُعْطَ أَحَدٌ قَبْلِيْ) إِلٰى قَوْلِه صَلَّى اللَّهُ تَعَالٰى عَلَيْهِ وَسَلَّمَ : وَأُعْطِيْتُ الشَّفَاعَتهَ

तर्जमा:-  इन छ: हदीसों में यह बयान हुआ हैं कि हुज़ूर शफ़ीउल मुज़निबीन “ﷺ” फ़रमाते हैं मैं शफ़ीअ मुक़र्रर कर दिए गया और शफ़ाअत ख़ास ( शफ़ाअते कुबरा ) मुझी को अता होगी मेरे सिवा किसी नबी को यह मनसब न मिला।

हदीस न. 22 , 23 :- इब्ने अब्बास व अबु सईद व अबु मूसा से इन्हीं हदीसों में वह मज़मुन भी है जो अहमद व बुख़ारी व मुस्लिम ने अनस और शेख़ैन ने अबु हुरैरा رضی اللہ تعالٰی عنہ से रिवायत किया रदियल्लाहु तआला अलैहिम अजमईन कि हुज़ूर शफ़ीउल मुज़निबीन “ﷺ” फ़रमाते हैं :-

( إِنَّ لِكُلِّ نَبِيِّ دَعْوَةً قَدْ دَعاَ بِهاَ فِيْ أُمَّتِه وَاسْتُجِيْبَ لَهٗ )  وَلَفْظُ ابْنِ عَبَّاسٍ : ( لَمْ يَبْفَ نَبِيٌّ إِلَّا أُعْطِيَ سُؤْلَهٗ) رَجَعْنَا إِلَى لَفْظِ أَنَسٍ وَأَلْفَاظُ الْبَاقِيْنَ كَمِثْلِه مَعْنًى ،قَالَ ( وَإِنِّى اخْتَبَأْتُ دَعْوَتِيْ شَفَاعَةً لِأُمَّتِيْ يَوْمَ الْقِيَامَتِه)  زَادَا أَبُوْ مُوْسٰى :  ( جَعَلْتُهَا لِمَنْ مَاتَ مِنْ أُمَّتِىْ لَا يُشْرِكُ بِاللّٰهِ شَيْئاً ) وَهٰذَا اللَّفْظُ لِأَنَسٍ وَلَفْظُ أَبِيْ سَعِيْدٍ : ( لَيْسَ مِنْ نَبِيِّ إِلَّا وَقَدْ أُعْطِيَ دَعْوَةً فَتَعَجَّلَهَا

तर्जमा : अम्बिया ‎‎عَلَيْهِ ٱلصَّلَوٰةُ وَٱلسَّلَٰمُ की अगरचे हज़ारों दुआएं क़बूल होती हैं मगर एक दुआ उन्हें ख़ास जनाबे बारी तआला से मिलती है कि जो चाहो मांग लो बेशक दिया जाएगा तमाम अम्बिया आदम से ईसा तक ( عَلَئھِمُ الصَّلٰوةُ وَٱلسَّلَٰمُ ) सब अपनी अपनी वह दुआ दुनिया में कर चुके और मैंने आख़िरत के लिए उठा रखी वह मेरी शफ़ाअत है मेरी उम्मत के लिए , क़्यामत के दिन मैंने उसे अपनी सारी उम्मत के लिए रखा है जो ईमान पर दुनिया से उठा।


      ऐ ख़ुदा हमें उनके मक़मों मनसब के तुफ़ैल उनकी शफ़ाअत अता फ़रमा अल्लाहु अकबर ! ऐ गुनाहगाराने उम्मत ! क्या तुमने अपने मालिक व मौला “ﷺ” की यह कमाले राफ़त व रहमत अपने हाल पर न देखी ? कि बारगाहे इलाही अज़्ज़ जलालुहू से तीन सवाल हुज़ूर “ﷺ” को मिले कि जो चाहो मांग लो अता होगा । 

हुज़ूर “ﷺ” ने उनमें कोई सवाल अपनी ज़ाते पाक के लिए न रखा, सब तुम्हारे ही काम में सर्फ़ फ़रमा दिए। दो सवाल दुनिया में किए वह भी तुम्हारे ही वास्ते तीसरा आख़रत को उठा रखा वह तुम्हारी उस अज़ीम हाजत के वास्ते जब उस मेहरबान मौला रऊफ़ुर्रहीम आक़ा “ﷺ” के सिवा कोई काम आने बाला बिगड़ी बनाने वाला न होगा।


 صَلَّى اللَّهُ تَعَالٰى عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

📚चालीस(40) अहादीसे शफ़ाअत, सफ़ा 15-16

✍️आला हज़रत इमामे अहले सुन्नत मौलाना शाह अहमद रज़ा खां علیہ الرحمتہ و الرضوان

✒️✒️मिन जानिब:- इल्म की रौशनी

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