चालीस अहादीसे शफ़ाअत (पार्ट 9)
हक़ फ़रमाया हज़रते हक़ عَزَّ وَجَلَّ ने
عَزِيْزٌ عَلَيْهِ مَا عَنِتُّمْ حَرِيْصٌ عَلَيْكُمْ بِالْمُؤْمِنِيْنَ رَءُوْفٌ رَّحِيْمٌ
तर्जमा : जिन पर तुम्हारा मशक्क़त में पड़ना गिरा है तुम्हारी भलाई के निहायत चाहने वाले मुसलमानों पर कमाल मेहरबान मेहरबान।
वल्लाहिल अज़ीम क़सम उसकी जिसने उन्हें हम पर मेहरबान किया कि हरगिज़ हरगिज़ कोई माँ अपने अज़ीज़ प्यारे इकलौते बेटे पर इतनी मेहरबान नहीं जिस क़द्र वह अपने एक उम्मती पर मेहरबान हैं ।
صَلَّى اللَّهُ تَعَالٰى عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
इलाही ! तू हमारा इज्ज़ (आजज़ी) व जुअफ़ (कमज़ोर होना) और उनके हुकूक़े अज़ीमया की अज़मत जानता है ऐ क़ादिर ! ऐ वाजिद ! ऐ माजिद ! हमारी तरफ़ से उन पर और उनकी आल पर वह बरकत वाली दुरूदें नाज़िल फ़रमा जो उनके हुक़ूक़ को वाफ़ी हों और उनकी रहमतों को मुकाफ़ी ।
اَللّٰھُمَّ صَلِّ وَسَلِّمْ وَ بَارِكْ عَلَيْهِ وَعَلٰى اٰلِه وَصَحْبِِه قَدْرَ رَأْفَتِه وَ رَحْمَتِه بِأُمَّتِه وَ قَدْرَ رَأْفَتِكَ وَ رَحْمَتِكَ بِه آمِيْن آمِيْن اِلٰهَ الْحَقَ ، آمِيْن
सुब्हानअल्लाह ! उम्मतियों ने उनकी रहमतों का यह मुआवज़ा रखा कि कोई अफ़ज़लियत में तशकीकें निकालता है (यानी उनके सबसे अफ़ज़ल होने में शक करता है), कोई उनकी शफ़ाअत में शुबा डालता है , कोई उनकी तारीफ़ अपनी सी जानता है , कोई उनकी ताज़ीम पर बिगड़ कर कर्राता है अफ़आले महब्बत का बिदअत इजलालो अदब पर शिर्क के अहकाम । (यानी आलाहज़रत फ़रमा रहे हैं कि हमारे आक़ा तो हम पर इतने मेहरबान कि हर वक़्त हमें याद रखें और कुछ लोग हैं कि उनके मरतबे में शक करते हैं बल्कि बाज़ तो अपने जैसा बशर जानते हैं)
اِنَّا لِلّهِ وَاِنَّـا اِلَيْهِ رٰجِعُونَ وَ سَيَعْلَمُ الَّذِیْنَ ظَلَمُؤآ اَىَّ مُنْقَلَبٍ يَّنْقَلِمُنَ وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ اِلَّا بِاللّٰهِ الْعَلِىِّ الْعَظِيْم
हदीस न. 24 : - सहीह मुस्लिम में हजरते उबई इब्ने कअब رضی اللہ تعالٰی عنہ से मरवी हुजूर शफीउल मुज़निबीन “ﷺ” फ़रमाते हैं:-
अल्लाह तआला ने मुझे तीन सवाल अता फ़रमाए मैने दो बार तो दुनिया में अर्ज़ कर ली اَللّٰھُمَّ اغْفِرْ لِأُمَّتِي اَللّٰھُمَّ اغْفِرْ لِأُمَّتِي इलाही मेरी उम्मत की मग़फिरत फ़रमा इलाही मेरी उम्मत की मग़फ़िरत फ़रमा وَأَخَّرْتُ الثَّالِثَتَ لِيَوْمٍ يَرْغَبُ إلَىَّ فِيْهِ الْخَلْقُ حَتّٰى إِبْرَاهِيْم और तीसरी अर्ज़ उस दिन के लिए उठा रखी जिस मे तमाम मखलूके इलाही मेरी तरफ़ नियाज़मन्द होगी यहाँ तक कि इब्राहिम ख़लीलुल्लाह عَلَيْهِ ٱلصَّلَوٰةُ وَٱلسَّلَامُ
وَصَلِّ وَسَلِّمْ وَ بَارِكْ عَلَيْهِ وَالْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعٰلَمِیْن
📚चालीस(40) अहादीसे शफ़ाअत, सफ़ा 16-17
✍️आला हज़रत इमामे अहले सुन्नत मौलाना अश् शाह इमाम अहमद रज़ा खां علیہ الرحمتہ و الرضوان
✒️✒️मिन जानिब:- इल्म की रौशनी
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Chalis (40) Ahadees E Shafaat Part 9

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