Rabi Ul Awwal Ki Khoobiyan, Part 4. Rabi Ul Awwal Kaise Gujarein?

 


रबी उल अव्वल की ख़ूबियां (पार्ट 4) 

रबी उल अव्वल कैसे गुज़ारें ?

नबी ए पाक “ﷺ” की मोहब्बत ईमान की बुनियाद है और महब्बत की एक अलामत ये है कि महबूब का कसरत से ज़िक्र किया जाए। 

रिवायत में है :- "مَنْ اَحَبَّ شَيْئَا اَكْثَرَ مِنْ ذِكْرِه" यानी जो किसी से महब्बत करता है उसका कसरत से ज़िक्र करता है। यूं तो सारा साल ही हमें नबिय्ये पाक “ﷺ” का ज़िक्रे ख़ैर करना और अपने क़ौलो फ़ेल के जरीए आप “ﷺ” से महब्बत का इज़हार करना चाहिए लेकिन बिल ख़ुसूस रबी उल अव्वल में अल्लाह करीम की इस अज़ीम नेअमत के शुक्राने के तौर पर ज़िक्रे हबीब “ﷺ” की कसरत करनी चाहिए और इस ज़िक्र के कई तरीक़े हैं मसलन नबिय्ये पाक “ﷺ” पर दुरूदे पाक पढ़ना , नात शरीफ़ पढ़ना , आप “ﷺ” की शानो अज़मत बयान करना, ( महल्ले दारों , राह चलने वालों वग़ैरह और हुक़ूक़े आम्मा का ख़्याल रखते हुए शरीअत के मुताबिक़ ) महफ़िले मीलाद करना और इस में शरीक होना वग़ैरह ज़िक्रे रसूल “ﷺ” हैं, लिहाज़ा रबी उल अव्वल में ये तमाम चीजें हमारे मामूलात में शामिल होनी चाहिए।

📚 रबी उल अव्वल की ख़ूबियां, सफ़ा 5

जारी है........

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Rabi Ul Awwal Ki Khoobiyan, Part 4. 

Rabi Ul Awwal Kaise Gujarein?

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