रबी उल अव्वल की ख़ूबियां, (पार्ट 6)
बारह रबी उल अव्वल का रोज़ा
12 रबी उल अव्वल के दिन रोज़ा रखिए कि हुज़ूर “ﷺ” की विलादत के दिन रोज़ा रखना अल्लाह पाक की नेअमत का शुक्र है और इसमें बहुत ज़्यादा अज्रो सवाब भी है। ख़ुद नबिय्ये करीम “ﷺ” हर पीर शरीफ़ ( Monday ) को रोज़ा रख कर अपना यौमे विलादत मनाते थे जैसा कि हज़रत ए सय्यदना अबू कतादा رضی اللہ تعالٰی عنہ फ़रमाते हैं :- बारगाहे रिसालत में पीर के रोज़े के बारे में पूछा गया तो इर्शाद फ़रमाया :- इसी दिन मेरी विलादत हुई और इसी रोज़ मुझ पर वही नाज़िल हुई।
नेअमत के शुक्राने में रोज़ा :- बिला शुबा रहमते आलम “ﷺ” की तशरीफ़ आवरी की नेअमत से दुनिया व आख़िरत के फ़वाइद व मनाफ़ेअ पूरे हो गए और इसी नेअमत के तुफ़ैल अल्लाह पाक का दीन मुकम्मल हुआ जिसे उस ने अपने बन्दों के लिये पसन्द फ़रमाया और इस दीन को क़बूल करना दुनिया व आख़िरत में लोगों की सआदत मन्दी का सबब है। और ऐसे दिन का रोज़ा रखना बहुत अच्छा है जिस में अल्लाह पाक के बन्दों पर उस की नेअमत नाज़िल होती हैं।
1000 साल की इबादत का सवाब :- अल्लाह पाक की अज़ीम नेअमत का शुक्र अदा करने के लिए इस माहे मुबारक में ज़्यादा से ज़्यादा नफ़्ली इबादात कीजिए। जवाहिरे ग़ैबी में है कि 12 रबी उल अव्वल के दिन रोज़ा रखने वाले को 1000 साल की इबादत का सवाब मिलता है नीज़ पांच , सोलह और छब्बीस रबी उल अव्वल को रोज़ा रखने का भी बहुत सवाब है।
📚 रबी उल अव्वल की ख़ूबियां, सफ़ा 8 - 9
जारी है.......
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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