सीरते मुस्तफ़ा صَلَّى اللَّهُ تَعَالٰى عَلَيْهِ وَسَلَّمَ , (पार्ट 6)
विलादते बा सआदत
काएनाते वुजूद के उलझे हुए गेसूओं को संवारने वाला , तमाम जहान के बिगड़े निज़ामों को सुधारने वाला या'नी
वोह नबियों में रहमत लक़ब पाने वाला,
मुरादें गरीबों की बर लाने वाला।
मुसीबत में गैरों के काम आने वाला,
वो अपने पराए का गम खाने वाला।
फ़क़ीरों का मावा, ज़ईफ़ों का मल्जा,
यतीमों का वाली, गुलामों का मौला।
सनदुल अस्फ़िया, अशरफुल अम्बिया, अहमदे मुज्तबा, मुहम्मद मुस्तफ़ा “ﷺ” आलमे वुजूद में रौनक़ अफरोज़ हुए और पाकीज़ा बदन, नाफ़ बुरीदा, ख़तना किये हुए खुश्बू में बसे हुए बा हालते सज्दा, मक्का ए मुकर्रमा की मुक़द्दस सर ज़मीन में अपने वालिदे माजिद के मकान के अन्दर पैदा हुए बाप कहां थे जो बुलाए जाते और अपने नौ निहाल को देख कर निहाल होते । वोह तो पहले ही वफ़ात पा चुके थे । दादा बुलाए गए जो उस वक़्त तवाफ़े का'बा में मश्गूल थे । ये ख़ुशख़बरी सुन कर दादा "अब्दुल मुत्तलिब" ख़ुश ख़ुश हरमे का'बा से अपने घर आए और वालिहाना जोशे महब्बत में अपने पोते को कलेजे से लगा लिया । फिर का'बे में ले जा कर खै़रो बरकत की दुआ मांगी और “मुहम्मद” नाम रखा।
आप “ﷺ” के चचा अबू लहब की लौंडी "सुवैबा" खुशी में दौड़ती हुई गई और "अबू लहब" को भतीजा पैदा होने की ख़ुशख़बरी दी तो उस ने इस खुशी में शहादत की उंगली के इशारे से "सुवैबा" को आज़ाद कर दिया जिस का समरा अबू लहब को ये मिला कि उस की मौत के बाद उस के घर वालों ने उस को ख़्वाब में देखा और हाल पूछा, तो उस ने अपनी उंगली उठा कर ये कहा कि तुम लोगों से जुदा होने के बाद मुझे कुछ (खाने पीने) को नहीं मिला बजुज़ इस के कि "सुवैबा" को आज़ाद करने के सबब से इस उंगली के जरीए कुछ पानी पिला दिया जाता हूं ।
📚बुख़ारी, जिल्द 2, बाबू व उम्महताकुमल्लति अर्दाअनकुम
📚 सीरते मुस्तफ़ा ﷺ, सफ़ा 70-71
जारी है.....
✒️✒️ मिन जानिब:- इल्म की रौशनी
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