Bayan Un Wajuh Ka Jinse Roza Na Rakhne Ki Izazat Hai, Part 1

 

बयान उन वजुह का जिन से रोज़ा न रखने की इजाज़त है,

पार्ट 1

हदीस शरीफ़


1. सहीहैन में उम्मुल मोमिनीन सिद्दीक़ा رضی اللہ تعالٰی عنہا से मरवी, कहती हैं हमज़ा बिन अम्र असलमी बहुत रोज़े रखा करते थे, उन्होंने नबी ए करीम “ﷺ” से दरयाफ़्त किया, कि सफ़र में रोज़ा रखू? इरशाद फ़रमाया :- चाहो रखो, चाहे न रखो। 

2. सही मुस्लिम में अबु सईद ख़ुदरी رضی اللہ تعالیٰ عنہ से मरवी, कहते हैं सोलहवें रमज़ान को रसूलल्लाह “ﷺ” के साथ हम जिहाद में गए। हम में बाज़ ने रोज़ा रखा और बाज़ ने ना रखा तो न रोज़ादारों ने ग़ैर रोज़ादारों पर ऐब लगाया और न उन्होंने उन पर।

 3. अबू दाउद व तिर्मीज़ी व निसाई व इब्ने माजा अनस बिन मालिक कअ़्बी رضی اللہ تعالیٰ عنہ से रावी, कि हुज़ूर ए अक़दस “ﷺ” ने फ़रमाया :- कि अल्लाह तआ़ला ने मुसाफ़िर से आधी नमाज़ माफ़ फ़रमा दी (यानी चार रकअ़त वाली दो पढ़ेगा) और मुसाफ़िर और दूध पिलाने वाली और हामिला से रोज़ा माफ़ फरमा दिया। (कि उनको इजाज़त है कि उस वक़्त न रखें बाद में वो मिक़दार पूरी कर लें।)


 मसाइल

1. सफ़र व हमल और बच्चे को दूध पिलाना और मर्ज़ और बुढ़ापा और ख़ौफ़े हलाक व इकराह व नुक़साने अक़्ल और जिहाद ये सब रोज़ा न रखने के लिए उज़्र हैं, इन वजहों से अगर कोई रोज़ा न रखे तो गुनाहगार नहीं।

2. सफ़र से मुराद सफ़रे शरई है यानी इतनी दूर जाने के इरादे से निकले कि यहाँ से वहाँ तक तीन दिन की मसाफ़त (दूरी) हो, अगरचे वो सफ़र किसी नाजाइज़ काम के लिए हो। 

3. दिन में सफ़र, किया तो उस दिन का रोज़ा इफ़्तार करने (तोड़ने) के लिए आज का सफ़र उज़्र नहीं। अलबत्ता अगर तोड़ेगा तो कफ़्फ़ारा लाज़िम न आएगा मगर गुनाहगार होगा और अगर सफ़र करने से पहले तोड़ दिया फिर सफ़र किया तो कफ़्फ़ारा भी लाज़िम और अगर दिन में सफ़र किया और मकान पर कोई चीज़ भूल गया था, उसे लेने वापस आया और मकान पर आकर रोज़ा तोड़ डाला तो कफ्फ़ारा वाजिब है।

 4. मुसाफ़िर ने ज़हवेकुबरा  से पेशतर (पहले) इक़ामत की और अभी कुछ खाया नहीं तो रोज़े की नियत कर लेना वाजिब है।

5. हमल वाली और दूध पिलाने वाली को अगर अपनी जान या बच्चे का सही अन्देशा है, (यानी बच्चे को खिलाने-पिलाने के लिए कोई चीज़ नहीं है और यही दूध पिलाती है तो अगर दूध न पिलाएगी तो बच्चे की जान को ख़तरा है) तो इजाज़त है कि उस वक़्त रोज़ा न रखे, ख़्वाह दूध पिलाने वाली बच्चा की माँ हो या दाई अगरचे रमज़ान में दूध पिलाने की नौकरी की हो।  


जारी है........

📚 बहार ए शरीअ़त, जिल्द 1, हिस्सा 5, सफ़ा 1002 - 1003


✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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