बयान उन वजुह का जिनसे रोज़ा न रखने की इजाज़त है,
पार्ट 6
32. उस की किसी भाई ने दावत की तो ज़हवेकुबरा के क़ब्ल रोज़ा ए नफ़्ल तोड़ देने की इजाज़त है।
33. औरत बग़ैर शौहर की इजाज़त के नफ़्ल और मन्नत व क़सम के रोज़े न रखे और रख लिए तो शौहर तुड़वा सकता है मगर तोड़ेगी तो क़ज़ा वाजिब होगी, मगर उसकी क़ज़ा में भी शौहर की इजाज़त दरकार है या शौहर और उसके दरमियान जुदाई हो जाए यानी तलाक़ ए बाइन दे दे या मर जाए हां अगर रोज़ा रखने में शौहर का कुछ हर्ज ना हो मसलन वो सफ़र में है या बीमार है या एहराम में है तो उन हालतों में बग़ैर इजाज़त के भी क़ज़ा रख सकती है, बल्कि अगर वो मना करें जब भी और उन दिनों में भी बे उसकी इजाज़त के नफ़्ल नहीं रख सकती। रमज़ान और क़ज़ा ए रमज़ान के लिए शौहर की इजाज़त की कुछ ज़रूरत नहीं बल्कि उसकी मुमानिअ़त पर भी रखें।
36. बांदी ग़ुलाम भी अ़लावा फ़राइज़ के मालिक की इजाज़त बग़ैर नहीं रख सकते। उनका मालिक चाहे तो तुड़वा सकता है फिर उसकी क़ज़ा मालिक की इजाज़त पर या आज़ाद होने के बाद रखें। अलबत्ता ग़ुलाम ने अगर अपनी औ़रत से ज़िहार किया तो कफ़्फ़ारा के रोज़े बग़ैर मौला की इजाज़त के रख सकता है।
35. मज़दूर या नौकर अगर नफ़्ल रोज़ा रखे तो काम पूरा अदा ना कर सकेगा तो मुस्ताजिर (यानी जिसका नौकर है या जिसने मज़दूरी पर उसे रखा है) उसकी इजाज़त की ज़रूरत है और काम पूरा कर सके तो कुछ ज़रूरत नहीं।
36. लड़की को बाप और मां को बेटे और बहन को भाई से इजाज़त लेने की कुछ ज़रूरत नहीं और मां-बाप अगर बेटे को रोज़ा ए नफ़्ल से मना कर दें, इस वजह से कि मर्ज़ का अंदेशा है तो मां-बाप की इताअ़त करे।
जारी है.......
📚 बहार ए शरीअ़त, जिल्द 1, हिस्सा 5, सफ़ा 1008
बयान उन वजुह का जिनसे रोज़ा न रखने का इजाज़त है मुकम्मल हुए।
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किसे रोज़ा न रखने की इजाज़त है?
Kise Roza Na Rakhne Ki Izazat Hai?
कब रोज़ा तोड़ने की इजाज़त है?
Kab Roza Todne Ki Izazat Hai?

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