Seerat Imam Ul Aadileen Hazrat Sayyaduna Umar Farooq E Aazam رضی اللہ تعالٰی عنہ, Part 3

 

इमाम उल आ़दिलीन हज़रत सय्यदुना उमर ए फ़ारुक़ ए आज़म رضی اللہ تعالیٰ عنہ 

(पार्ट - 3)

रौशन सीरत

आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ ज़ोहद व तक़वा, अदल व इन्साफ़ और ख़ुदा ख़ौफ़ी के जिस मक़ाम पर फ़ाइज़ थे वो आप ही का हिस्सा है सफ़र हो या हज़र, घर में हों या बाहर आप ने अपनी ज़िन्दगी निहायत सादगी से गुज़ारी। जहां आराम करना होता तो ज़मीन पर चादर बिछाते और उस पर लेट जाते, कभी दरख़्त पर चादर डाल कर उसके साए में आराम कर लेते। एक मर्तबा ख़ुत्बा दिया तो उस वक़्त बदन पर मौजूद चादर में 12 पैवन्द लगे हुए थे। 

तकब्बुर को दूर कर दिया

एक अज़ीम सलतनत के अज़ीम अमीर होने के बावजूद आ़जिज़ी का ये आ़लम था कि एक बार कन्धे पर पानी से भरा हुआ मशकीज़ा उठाया हुआ था, किसी ने अ़र्ज़ की :- ऐ मुसलमानों के अमीर! ये काम आपके लिए मुनासिब नहीं है। फ़रमाया :- मेरे पास लोगों के वफ़्द दर वफ़्द आते हैं जिसकी वजह से मुझे अपने दिल में फ़ख़्र व बड़ाई की लहर महसूस हुई लिहाज़ा मशकीज़ा उठाकर उस लहर को पाश पाश कर देना चाहता हूँ। फिर अन्सारी सहाबिया رضی اللہ تعالیٰ عنہا के घर के क़रीब तशरीफ़ लाए और उनके बर्तनों को पानी से भर दिया।

ख़ौफ़ ए ख़ुदा और इबादात

आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ मदीना मुनव्वरा के बच्चों से अपने लिए दुआ़ कराते कि दुआ़ करो उमर बख़्शा जाए। आपकी ज़बान ए अक़दस पर अक्सर اللہ اکبر जारी रहता था। आख़री उम्र में मुसलसल रोज़े रखना शुरू कर दिए थे।

जारी है.......

📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना, अक्टूबर 2017

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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