Seerat Ameerul Momineen Hazrate Sayyaduna Usman E Ghani رضی اللہ تعالٰی عنہ, Part 1

 

अमीरुल मोमिनीन हज़रते सय्यदुना उस्मान ए ग़नी رضی اللہ تعالیٰ عنہ 

(पार्ट 1)

अगर मेरी दस बेटियाँ भी होतें तो मैं एक के बाद दूसरी से तुम्हारा निकाह कर देता क्योंकि मैं तुमसे राज़ी हूँ।

नबी ए रहमत “ﷺ” के ये आज़ज़ी और रज़ामन्दी के कलिमात मुसलमानों के इस अज़ीम ख़ैर ख़्वाह हमदर्द और ग़म गुसार हस्ती के लिए हैं जिसे तीसरे ख़लीफ़ा अमीरुल मोमीनिन हज़रत ए सय्यदुना उस्मान ए ग़नी رضی اللہ تعالیٰ عنہ के नाम से जाना जाता है।

पैदाइश व क़बुल ए इस्लाम

आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ आ़मुल फ़ील (अबरहा बादशाह के मक्का मुकरमा पर हाथियों के साथ हमले) के 6 साल बाद मक्का मुकरमा में पैदा हुए। आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ उन ख़ुश नसीबों में से हैं जिन्होंने इब्तदा ही में दाई ए इस्लाम “ﷺ” की पुकार पर लब्बैक कहा। इस्लाम लाने के बाद चचा हकम बिन अबुलआ़स ने आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ को रस्सियों से बांध दिया और दीन ए इस्लाम छोड़ने को कहा तो आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने उसे साफ़ साफ़ कह दिया मैं दीन ए इस्लाम को कभी भी नहीं छोडुगां और ना ही कभी इससे जुदा होउंगा।

हुलिया मुबारक 

आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ का सीना चौड़ा, क़द दरमियाना कि ज़्यादा लम्बा ना ज़्यादा छोटा और ख़दोख़ाल हसीन थे जिन्हें गनदुमी रंग ने और पुरकशीश बना दिया था जबकि ज़र्द ख़िज़ाब में रंगी हुई बड़ी दाढ़ी चेहरे पर बहुत भली मालूम होती थी।

जारी है........ 

📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना, सितम्बर 2017

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी



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