अमीरुल मोमिनीन हज़रत ए सय्यदुना उस्मान ए ग़नी رضی اللہ تعالیٰ عنہ
(पार्ट 5)
ख़ौफ़ ए ख़ुदा
ऐसा कि एक बार अपने ग़ुलाम से फ़रमाया :- मैंने एक मर्तबा तुम्हारा कान खींचा था, तुम मुझसे उसका बदला ले लो, उसने कान पकड़ा तो फ़रमाया :- ज़ोर से खिंचों, फिर फ़रमाया :- कितनी अच्छी बात है कि क़िस्सास का मामला दुनिया में ही है, आख़िरत में नहीं।
दौरे ख़िलाफ़त
आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ यक्कुम मुहर्रम उल हराम 24 हिजरी को मसनदे ख़िलाफ़त पर फ़ाइज़ हुए। आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ के दौर ए ख़िलाफ़त में अफ़्रीक़ा, मुल्के रुम का बड़ा इलाक़ा और कई बड़े शहर इस्लामी सल्तनत का हिस्सा बनें। 26 हिजरी में मस्जिद ए ह़राम की तौसिअ़ जबकि 29 हिजरी में मस्जिद ए नबवी शरीफ़ की तौसिअ़ करते हुए पत्थर के सुतुन और सागवान की लकड़ी की छत बनवाई।
विसाल मुबारक
आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने 12 साल ख़िलाफ़त पर फ़ाइज़ रह कर 18 ज़िलहिज्ज सन 35 हिजरी में बरोज़े जुमुआ़ रोज़े की ह़ालत में तक़रीबन 82 साल की त़वील उ़म्र पा कर निहायत मज़लूमियत के साथ जामे शहादत नोश फ़रमाया।
जन्नत के दुल्हा
शहादत के बाद ह़ज़रत ए सय्यदुना अ़ब्दुल्लाह बिन अ़ब्बास رضی اللہ تعالیٰ عنہما ने रह़मते आ़लम “ﷺ” को ख़्वाब में फ़रमाते हुए सुना बेशक! उ़स्मान رضی اللہ تعالیٰ عنہ को जन्नत में आ़लीशान दूल्हा बनाया गया है।
✍🏻 अ़दनान अहमद अत्तारी मदनी
📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना, सितम्बर 2017
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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