अमीरुल मोमिनीन हज़रते सय्यदुना उस्मान ए ग़नी رضی اللہ تعالیٰ عنہ
(पार्ट 2)
अलक़ाब व इज़ाज़त
आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने रह़मते आ़लम “ﷺ” के दो साहबज़ादियों رضی اللہ تعالیٰ عنہما से यके बा दिगरे निकाह कर के ज़ुननुरैन (दो नुर वाले) का लक़ब पाया, हज़रत ए सय्यदुना लुत علیہ السلام के बाद आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ सब से पहली हस्ती हैं जिन्होंने रज़ा ए इलाही की ख़ातिर अपने अहले ख़ाना के साथ हिजरत फ़रमाई। और हिजरत भी एक नहीं दो दफ़आ की, एक मर्तबा हबशा की तरफ़ तो दुसरी बार मदीने की जानिब। आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने दुनिया में क़ुरआन ए करीम की नशरो इशाअ़त फ़रमा कर उम्मते मुस्लिमा पर एहसान ए अ़ज़ीम किया और जामिउल क़ुरआन होने का एज़ाज़ पाया। आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ ने ज़माना ए जाहिलियत में ना कभी शराब पी, ना बदकारी के तरफ़ गए, ना कभी चोरी की, ना गाना गाया और ना ही कभी झुठ बोला।
सीरत ए मुबारका
अदब, सख़ावत, ख़ैर ख़्वाही, हया, सादगी, आ़जीज़ी, रहम दिली, दिल जोई, फ़िकरे आख़िरत, इत्तेबाए सुन्नत और ख़ौफ़े ख़ुदा आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ की सीरत ए मुबारका के रौशन पहलु हैं।
अदबे रसूल “ﷺ”
ऐसा था कि जिस हाथ से रह़मते आ़लम “ﷺ” के दस्ते हक़ परसत पर बयत की उस हाथ से कभी अपनी शर्मगाह को नहीं छुआ।
जारी है........
📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना, सितम्बर 2017
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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