अमीरुल मोमिनीन हज़रते सय्यदुना उस्मान ए ग़नी رضی اللہ تعالیٰ عنہ
(पार्ट 3)
सख़ावत
ऐसी कि ग़ज़वा ए तबुक के मौक़ा पर मुसलमानों की बे सरो सामानी को देखते हुए पहली दफ़ा 100 ऊंट, दुसरी मर्तबा 200 ऊंट और तीसरी मर्तबा 300 ऊंट देने का वादा किया। मगर हाज़िर करने के वक़्त आप ने 950 ऊंट, 50 घोड़े और 1000 अशरफ़ियां पेश किएं, फिर बाद में 10000 अशरफ़ियां और पेश किएं।
ख़ैर ख़्वाही
ऐसी की हर जुम्आ़ को ग़ुलाम आज़ाद किया करते, अगर किसी जुम्आ़ नाग़ा हो जाता तो अगले जुम्आ़ दो ग़ुलाम आज़ाद करते थें।
बा हया
ऐसे कि बन्द कमरे में ग़ुस्ल करते हुए ना अपने कपड़े उतारते और ना ही अपनी कमर सिधी कर पाते।
लिबास में सादगी
ऐसी कि माल व दौलत की फ़रावानी के बावजूद जुम्आ़ के दिन मिम्बर पर ख़ुत्बा देते हुए भी चार या पांच दिरहम का मामुली तहबंद जिस्म की ज़िनत होता।
खाने में सादगी
ऐसी कि लोगों को अमीरों वाला खाना खिलाते और ख़ुद घर जाकर सिरका और ज़ैतुन पर गुज़ारा करते।
आ़जीज़ी
ऐसी कि ख़िलाफ़त जैसे अ़ज़ीम मनसब पर फ़ाइज़ होने के बावजूद ख़च्चर पर सुवार होते तो पीछे ग़ुलाम को बैठाने में कोई शर्म महसूस ना करते।
जारी है......
📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना, सितम्बर 2017
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

0 Comments