Seerat Imam Ul Aadileen Hazrat Sayyaduna Umar Farooq E Aazam رضی اللہ تعالٰی عنہ, Part 1

 

इमाम उल आ़दिलीन हज़रत सय्यदुना उमर ए फ़ारुक़ ए आज़म رضی اللہ تعالیٰ عنہ 

(पार्ट - 1)

सेहराए अ़रब की चिलचिलाती और सख़्त धूप में एक शख़्स अपने सर पर चादर डाले मदीना मुनव्वरा  زادهَا اللّٰه شرفاً وَّ تعظيماً की जानिब बढ़ रहा था, रास्ते में गधे पर सवार एक ग़ुलाम को देखा तो उससे कहा :- गर्मी बहुत है मुझे अपने पीछे सवार कर लो, ग़ुलाम ने उस शख़्स को पहचान लिया, फ़ौरन उतर कर अ़र्ज़ की :- आप इस पर सवार हो जाइए, मगर उस शख़्स ने कहा :- तुम सवार हो जाओ और मैं तुम्हारे पीछे बैठुंगा, ग़ुलाम ने फिर अ़र्ज़ की :- आप सवार हो जाइए और मैं पैदल चलता हुँ, मगर वो शख़्स ना माना बिल आख़िर ग़ुलाम ने उस शख़्स को अपने पीछे सवार कर लिया। दोनों सवार जब मदीना मुनव्वरा की हुदूद में दाख़िल हुए तो लोग उस शख़्स को हैरत से तक रहे थे। मीठे मीठे इस्लामी भाइयों! ग़ुलाम के पीछे सवार होने वाला कोई आ़म आदमी ना था बल्कि वो अ़ज़ीम हस्ती थी जिसने कुफ़्र व गुमराही के शहरों में हिदायत की शमएं रौशन कि, क़ैशरो किसरा के गुरुर को ख़ाक में मिलाया। जिसके दौरे हुकूमत में एक हज़ार से ज़ाइद शहर फ़तह हुए, चार हज़ार से ज़ाइद मसाजिद तामिर की गईं। ये मोहतरम हस्ती इमाम उल आ़दिलीन अमीरुल मोमीनिन हज़रत ए सय्यदुना फ़ारुक़ ए आज़म رضی اللہ تعالیٰ عنہ की ज़ाते मुक़दसा है। 

कुन्नियत, लक़ब, हुलिया मुबारका

आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ की कुन्नियत अबु हफ़्स और लक़ब फ़ारुक़ ए आज़म है। आप दराज़ क़द, भारी जिस्म और सफ़ेद रंगत वाले जबकि दाढ़ी मुबारका घनी और घुंघरयाली थी। आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ आ़मुल फ़िल के 13 साल बाद पैदा हुए। युं आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ की तारीख़ ए विलादत 583 ईस्वी है।

जारी है........

📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना, अक्टूबर 2017

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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