इमाम उल आ़दिलीन हज़रत सय्यदुना उमर ए फ़ारुक़ ए आज़म رضی اللہ تعالیٰ عنہ
(पार्ट - 2)
इस्लाम से पहले और इस्लाम के बाद
आप अशराफ़े क़ुरैश में अपनी ज़ाती व ख़ानदानी वजाहत के लिहाज़ से बहुत ही मुमताज़ थे। आप ने ज़माना ए जाहिलीयत में कुफ़्फ़ारे मक्का के लिए कई जन्गों में सिफ़ारत के फ़राइज़ भी सर अन्जाम दिए थे। एक रिवायत के मुताबिक़ आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ 39 मर्दों के बाद, रहमत ए आ़लम “ﷺ” की दुआ़ से ऐलाने नबुवत के छठे (6) साल ईमान लाए। आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ के ईमान लाने पर मुसलमानों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई यहां तक कि कुफ़्फ़ार व मुशरेकिन ये कहने पर मजबूर हो गए कि आज हमारी ताक़त घट कर आधी रह गई है।
मुजाहिदाना ज़िन्दगी
आप رضی اللہ تعالیٰ عنہ तमाम ग़ज़वात में मुजाहिदाना शान के साथ कुफ़्फ़ार से लड़ते रहे। कई मअ़रिकों में सिपहसालार के फ़राइज़ भी सर अन्जाम दिए जबकि वज़ीर व मशीर की हैसियत से तमाम इस्लामी मुआ़मलात और सुलह व जंग वग़ैरह की तमाम मन्सुबा बन्दीयों में हुज़ूर नबी ए करीम “ﷺ” और हज़रत अबुबकर सिद्दिक़ رضی اللہ تعالیٰ عنہ के वफ़ादार रफ़ीक़े कार रहे।
जारी है......
📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना ,अक्टूबर 2017
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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