मुहर्रम उल हराम में सवाब कमाने के तरीक़े
अल्लाह तआ़ला मालिक व मुख़्तार है, जिसे चाहे बख़्श दे, और जिसे चाहे अ़ज़ाब दे, वो कभी छोटी सी नेकी पर बख़्श देता है तो बसा अवक़ात छोटी सी ख़ता पर पकड़ भी फ़रमाता है लिहाज़ा किसी नेकी को छोटा समझ कर तर्क नहीं करना चाहिए कि बज़ाहिर छोटी नज़र आने वाली नेकी बहुत बड़े अज्रो सवाब का बाइस हो सकती है। मुहर्रम उल हराम का महीना निहायत बरकतों और फ़ज़िलतों वाला है, इस माहे मुबारक में रोज़ा रखने का बहुत ज़्यादा सवाब है।
मुहर्रम के एक दीन के रोज़े का सवाब
हुज़ूर नबी ए रहमत “ﷺ” का फ़रमाने आलिशान है, मुहर्रम उल हराम के हर दिन का रोज़ा एक माह के रोज़ों के बराबर है।
आ़शुरा 10 मुहर्रम उल हराम के दिन रोज़ा रखना सुन्नत है
एक साल के गुनाह मीट जाएं
हज़रत ए सय्यदुना अबु क़तादह رضی اللہ تعالیٰ عنہ से रिवायत है रसूल ए अकरम “ﷺ” ने फ़रमाया, मुझे अल्लाह तआ़ला पर गुमान है कि आ़शुरा का रोज़ा एक साल पहले के गुनाह मिटा देता है।
यहुदीयों की मुख़ालिफ़त कीजिए
जो आ़शुरा के दिन रोज़ा रखना चाहे तो उसे चाहिए कि वो 9 मुहर्रम या 11 मुहर्रम का रोज़ा भी रखे जैसा कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया, आ़शुरा के दिन रोज़ा रखो और इस में यहुदीयों की इस तरह मुख़ालिफ़त करो कि उससे पहले या बाद में भी एक दीन का रोज़ा रखो।
📚 माहनामा फ़ैज़ान ए मदीना, अक्टूबर 2017
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
0 Comments